श्योपुर जिले के कराहल पंचायत के माजरा भीम नगर में मुक्तिधाम नहीं है। गांव में कुशवाहा, बंजारा और आदिवासी समाज के करीब 60 परिवार रहते हैं। वर्षों से ग्रामीण मुक्तिधाम निर्माण की मांग कर रहे हैं, लेकिन अब तक कोई व्यवस्था नहीं हो सकी है। मजबूरी में ग्रामीणों को शवों का अंतिम संस्कार जंगल या अपने खेतों में करना पड़ता है। सोमवार रात करीब 2 बजे मीरा पति जोरा बंजारा की तबीयत अचानक बिगड़ गई और उनकी मौत हो गई। सुबह मुक्तिधाम न होने के कारण परिजनों और ग्रामीणों को शव को करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल में ले जाकर अंतिम संस्कार करना पड़ा। बरसात में बढ़ जाती है परेशानी ग्रामीणों ने बताया कि मुक्तिधाम नहीं होने से सबसे ज्यादा परेशानी बरसात के समय होती है। शव को गांव से करीब 2 किलोमीटर दूर जंगल तक पगडंडी रास्तों से ले जाना पड़ता है। जिन परिवारों के पास खेत नहीं हैं, उन्हें जंगल में ही अंतिम संस्कार करना पड़ता है, जिससे कई तरह की दिक्कतें सामने आती हैं। सालों से दिया आवेदन, फिर भी नहीं हुई व्यवस्था गांव के बलराम कुशवाहा, मुकेश बंजारा, सियाराम आदिवासी, हरिओम कुशवाह, लखन कुशवाहा, कल बंजारा, पांचया आदिवासी, सूआ जाटव और अमर जाटव सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि वे कई वर्षों से सरपंच, सचिव, तहसीलदार, एसडीएम, कलेक्टर और मंत्रियों तक आवेदन दे चुके हैं। इसके बावजूद आज तक भीम नगर में मुक्तिधाम का निर्माण नहीं हो पाया है। मामले में पंचायत सचिव जगमोहन गुर्जर ने बताया- उनके पास अभी तक भीम नगर के निवासियों की ओर से कोई आवेदन नहीं आया है। वे स्वयं गांव जाकर स्थिति देखेंगे और वहां जल्द निर्माण की प्रक्रिया शुरू कराई जाएगी, ताकि ग्रामीणों को खेत या जंगल में अंतिम संस्कार न करना पड़े।


