श्योपुर नगर पालिका परिषद के कर्मचारियों की हड़ताल बुधवार को दूसरे दिन भी जारी रही। सफाई कर्मचारियों, संविदा और आउटसोर्स कर्मचारियों ने नगर पालिका कार्यालय के सामने टेंट लगाकर धरना दिया और अपनी मांगों को लेकर प्रदर्शन किया। हड़ताल के कारण शहर की सफाई व्यवस्था पूरी तरह ठप हो गई है, जिससे नागरिकों को परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कर्मचारियों का कहना है कि उन्हें पिछले दो से तीन माह से वेतन नहीं मिला है। इस आर्थिक तंगी के कारण उन्हें बच्चों की पढ़ाई, इलाज और घर खर्च चलाने में कठिनाई हो रही है। कई कर्मचारियों ने बताया कि उन्हें बीते तीन महीनों से बिल्कुल भी वेतन का भुगतान नहीं किया गया है। हड़ताल पर बैठे कर्मचारियों की प्रमुख मांगों में लंबित वेतन का तत्काल भुगतान और भविष्य में हर माह की 5 तारीख तक वेतन सुनिश्चित करना शामिल है। इसके अतिरिक्त, उन्होंने वर्ष 2022 से अब तक वेतन से काटी जा रही एमपीएस (MPS) और जीपीएफ (GPF) की राशि को संबंधित खातों में जमा कराने की मांग की है। कर्मचारियों का आरोप है कि वेतन से कटौती तो की जा रही है, लेकिन यह राशि उनके खातों में जमा नहीं हो रही, जो एक गंभीर वित्तीय अनियमितता है। कर्मचारियों ने शासन के आदेशानुसार विनियमितीकरण (स्थायीकरण) करने की भी मांग की है। वे 5 से 7 हजार रुपये मानदेय पर काम कर रहे कर्मचारियों को ‘समान कार्य के बदले समान वेतन’ देने की मांग कर रहे हैं। साथ ही, सेवानिवृत्त कर्मचारियों को अब तक लंबित अवकाश नकदीकरण (लीव एनकैशमेंट) और अन्य देय राशियों का भुगतान करने की मांग भी उठाई गई है। कर्मचारियों ने बताया कि मंगलवार को उन्होंने कलेक्टर को ज्ञापन सौंपकर अपनी समस्याओं से अवगत कराया था। हालांकि, अब तक कोई ठोस कार्रवाई या आश्वासन नहीं मिला है। इसी कारण उन्हें मजबूरन हड़ताल जारी रखनी पड़ रही है। सफाईकर्मियों के काम बंद करने से शहर के कई इलाकों में कचरे के ढेर लग गए हैं और बदबू फैलने लगी है। नागरिकों ने प्रशासन से जल्द समाधान की मांग की है। कर्मचारियों ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि जब तक उनकी सभी मांगें पूरी नहीं होतीं, तब तक हड़ताल जारी रहेगी।


