भास्कर न्यूज | जालंधर कहते हैं कि भगवान भाव के भूखे होते हैं, और इसका जीवंत प्रमाण शुक्रवार को कमल विहार स्थित शिव दुर्गा खाटू श्याम मंदिर में देखने को मिला। यहां बसंत पंचमी के पावन अवसर पर भक्तों ने अपने आराध्य श्याम बाबा के वस्त्र (बागा) अत्यंत विधि-विधान और भावुकता के साथ बदले।मंदिर के पुजारी गौतम भार्गव ने बताया कि यह परंपरा अत्यंत विशेष है। बाबा को पहनाई जाने वाली ‘पीली बासंती पोशाक’ (अंतवस्त्र) साल में केवल एक बार बसंत पंचमी के दिन ही बदली जाती है। बाबा पूरे 365 दिन इसी पोशाक को धारण किए रहते हैं, जिसे अगले वर्ष आज ही के दिन बदला जाता है। भक्तों के लिए यह केवल वस्त्र परिवर्तन नहीं, बल्कि एक आध्यात्मिक उत्सव है। पुजारी ने बताया कि कई बागे महीनों की कड़ी मेहनत और पूर्ण शुद्धता के साथ तैयार किए जाते हैं तो ऐसे कई उदाहरण हैं जहां निर्धन भक्तों ने अपनी जीवन भर की जमा पूंजी केवल इसलिए लगा दी ताकि वे अपने ‘सांवरे’ के लिए एक सुंदर बागा तैयार करवा सकें। भक्तों के लिए यह केवल कपड़ा नहीं, बल्कि ‘प्रेम का आवरण’ है, जिसमें उनकी भावनाएं लिपटी होती हैं। श्याम बाबा द्वारा धारण किया गया बागा (उतरन) पाना किसी बड़े सौभाग्य या वरदान से कम नहीं माना जाता। भक्तों में इस वस्त्र को लेकर ऐसी मान्यता है कि जिसके घर यह पहुंच जाता है, वहां साक्षात बाबा का वास होता है। लोग इसे अपने घर के मंदिर में पूरी श्रद्धा के साथ रखते हैं, ताकि बाबा का आशीर्वाद और कृपा उनके परिवार पर सदा बनी रहे।


