श्रीराम नाम में अपार शक्ति यह भव सागर से तारने वाला मंत्र : धर्मपाल

भास्कर न्यूज | अमृतसर मजीठा रोड ग्रीन फील्ड स्थित श्री मुक्ति नारायण धाम वेंकटेश मंदिर में चल रहे श्रीरामचरितमानस पाठ के 8वें दिन कई भक्तजन पहुंचे। पंडितों ने सुबह श्री ठाकुर जी की पूजा मंत्रोच्चारण के साथ की। इस पाठ में भगवान श्रीराम द्वारा शिव धनुष तोड़ने का प्रसंग पढ़ा तो मंदिर प्रांगण श्री राम के जयकारों से गूंज उठा। मंदिर ट्रस्टी चरणजीत अग्निहोत्री ने कहा कि भगवान शिव का धनुष तोड़ने वाला कोई साधारण मानव नहीं बल्कि स्वयं भगवान विष्णु थे। जिन्होंने मानव कल्याण और साधु संतों की रक्षा के लिए धरती पर जन्म लिया। इस मौके पर भक्तों द्वारा ठाकुर जी को भोग लगाकर प्रसाद बांटा। इस मौके पर मंदिर ट्रस्टी धर्मपाल पराशर ने बताया कि यह पाठ 27 जुलाई तक चलेगा। उन्होंने बताया कि स्वामी श्री रामाचार्य जी महाराज और स्वामी श्री सुदर्शनाचार्य जी महाराज के जन्मोत्सव के उपलक्ष्यमें हर साल यह पाठ किए जाते हैं। इस मौके पर चरणजीत भास्कर, कृष्णदेव अग्निहोत्री, रवि शर्मा, रूपेश गोयन्का, रामजी दास, विनय मेहरा, राजेश शर्मा लाड्डी, नवदीप गोल्डी, कौशल, संजीव ,पं. जयकिशन दास, पं. विष्णु व भक्त मौजूद रहे। अमृतसर | दुर्ग्याणा परिसर में स्थित गोस्वामी तुलसीदास मंदिर में श्री रामचरितमानस पाठ किया गया। गोस्वामी तुलसीदास जयंती के उपलक्ष्य में सुबह 8 से साढ़े 9 बजे तक चले पाठ दौरान कई भक्त पहुंचे। इसी दौरान धर्मपाल जी ने पाठ दौरान दोहे पढ़कर उनका सार समझाया। उन्होंने कहा कि श्री राम नाम में अपार शक्ति है। यह भवसागर से तारने वाला मंत्र है। धर्मपाल ने कहा कि जब प्रभु श्री राम पिता की आज्ञा से वनों में गए तो खेवट ने भी प्रभु के चरणरज प्राप्त की और उनके बाद उन्हें नदी पार कराई। खेवट ने प्रभु से कुछ न मांगकर सिर्फ संसार रुपी भवसागर से पार कर देना ही मांगा। इससे प्रभु प्रसन्न हुए और खेवट को भवसागर से पार करने का वचन दिया। उन्होंने कहा कि प्रभु भक्ति अनमोल है और उनके हीरे मोती हरेक को नहीं मिलते। इसके लिए भक्ति, तप, त्याग अति जरूरी है। कथा दौरान हरिनाम संकीर्तन में सभी को सराबोर किया। आरती के बाद पाठ को विराम दिया गया। इस मौके पर मंदिर में कई भक्तजन मौजूद रहे। इस मौके मौजूद भक्तों ने भजनों से मंदिर का माहौल राममय बना दिया।

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