भास्कर न्यूज | अमृतसर परम पूज्य श्री भक्त हंसराज जी महाराज की असीम अनुकंपा से उनके प्रिय शिष्य तिलक राज वालिया जी के सान्निध्य में शिवाला बाग भाइयां के श्री राम मंदिर में 9 दिवसीय श्री रामायण महायज्ञ चल रहा है। जिसमें सैकंडों राम भक्तों ने आकर कथा का आनंद उठाया। कथा में वालिया जी ने कहा कि कबंध राक्षस की बात मान कर प्रभु श्री राम जी ऋषि मुक पर्वत पर सुग्रीव से मिलने जाते हैं। रास्ते में प्रभु श्री राम पंपा वन में भीलनी की कुटिया में मिलने गए। भील वंश की भीलनी मतंग ऋषि की शिष्या थी। एक बार लोगों ने पंपा सरोवर से भीलनी को छोटी जाति का समझकर उसका पानी लेना बंद कर दिया। भीलनी के गुरु ने आशीर्वाद दिया कि श्री राम जी जब पंपा वन में आएंगे तो सबसे पहले तुम्हारी कुटिया में ही आएंगे। भीलनी प्रतिदिन इंतजार करती थी, राम आए भीलनी को मानो सब कुछ मिल गया हो। भीलनी ने कहा मेरी गुरु पूजा सफल हुई। उसने राम जी को चख-चख कर मीठे बेर खिलाए हैं और प्रभु झूठे बेर खाते गए। भीलनी से जब प्रभु राम जी विदा लेने लगे तो कई लोग इकट्ठे होकर प्रभु जी के दर्शन को आए। उन्होंने कहा पंपा सरोवर का पानी कुछ समय से पीने के लायक नहीं रहा इसमें कीड़े पड़ गए हैं। प्रभु राम जी लोगों के साथ भीलनी को लेकर पंपा सरोवर पहुंचे पानी कीड़ों से भरा था। राम जी ने भीलनी को कहा कि सरोवर के पानी में अपना पैर डालें। जैसे ही भीलनी ने राम जी के कहने पर सरोवर के पानी में पैर डाले तो सारा जल निर्मल हो गया।


