श्रीश्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी का 137वां जन्मोत्सव मना, 152 लोगों ने दीक्षा ली

सिटी रिपोर्टर | रांची हरमू मैदान में परम प्रेममय श्री श्री ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की 137वां जन्मोत्सव रविवार को मनाया गया। उत्सव की शुरुआत वेद मांगलिक के साथ सुबह 4.30 बजे की गई। इसके बाद 5 बजे उषा कीर्तन, 6.31 बजे से प्रात: कालीन सामूहिक प्रार्थना व पवित्र ग्रंथ का वाणी पाठ किया गया। 7.30 बजे संगीतांजलि दी गई। सुबह 9.30 बजे से गाजे बाजे के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में ठाकुर अनुकूलचंद्र जी की सुसज्जित वाहन को पूरे हरमू क्षेत्र में भ्रमण कराया गया। इस दौरान हजारों की संख्या में सत्संगी वाहन के पीछे चल रहे थे। सुबह 11.30 बजे से धर्म सभा का आयोजन हुआ। धर्म सभा का संचालन सत्संगी डॉ. जयदेव पति ने किया। उन्होंने कहा कि आज के लोग बहुत ही महत्वाकांक्षी होते हैं, पर जो व्यक्ति सद्गुरु को अपनाते हैं वे शुभाकांक्षी हो जाते हैं। आईआईएसएम धनबाद के डॉ. आरके चौधरी ने जीवन में सद्गुरु की महत्ता को बताते हुए कहा कि सद्गुरु हमारे जीवन के उत्स के मूल होते हैं, जो मनुष्य अपने जीवन में सद्गुरु रूपी उत्स के मूल को लेकर उनके नीति विधि को जितना चरितार्थ करता है, उसका जीवन उतना ही उन्नत होता है। इसका प्रभाव व्यक्ति के व्यक्तिगत जीवन के साथ साथ पारिवारिक जीवन पर भी होता है। अगर वह अपने जीवन को गुरु के अधीन नियंत्रित कर चले तो पूरे विश्व पर विजय प्राप्त कर सकता है। कार्यक्रम के दौरान 152 लोगों ने दीक्षा ली और 10 लोगों का पुनश्चरण हुआ। इस दौरान झारखंड के सभी जिलों से 15 हजार सत्संगी पहुंचे। दोपहर 1.30 से 3 बजे तक डॉक्टर और प्रोफेसर सम्मेलन किया गया। उसके बाद 3 से 4 बजे तक सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। सत्संगी के भक्त मंडली द्वारा भजन कीर्तन प्रस्तुत किया गया। इस दौरान राधा नाम में परम आनंद रे, राधे राधे गोबिंद भजो, राधे राधे गोबिंद भजो.., जैसे भजनों की प्रस्तुति दी गई। युवा मंडली द्वारा मनमोहक नाट्य प्रस्तुत किया गया। नाटक के माध्यम से ठाकुर जी की जीवनी बताई गई। शाम 4 बजे से मातृ सम्मेलन आयोजित हुआ। डॉ. संविता, रोमी, तनीषा मोहिनी, चंपा, अर्यमा मनीषा श्रुति मां ने कार्यक्रम को संबोधित किया। दूसरे वक्ता प्रख्यात हृदय चिकित्सा डॉ. हेमंत नायक ने श्री श्री ठाकुर जी की भावधारा की चर्चा करते हुए कहा कि मनुष्य अपने जीवन में ठाकुर जी द्वारा प्रदत्त स्वास्थ्य की व्रत को अपनाएं। शाकाहारी जीवन मनुष्य की प्राकृतिक भोजन है। उन्होंने कहा कि परम दयाल कहते हैं कि 120 वर्ष का जीवन मनुष्य प्राकृतिक के विधानों को मानकर चले तो निरोगी जीवन जी सकता है। धर्म सभा के बाद भंडारा का आयोजन किया गया, जिसमें करीब 15 हजार लोगों ने खिचड़ी का भोग खाया।

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