श्री भैणी साहिब में श्री सतगुरु राम सिंह की 210 वीं जयंती का राज्य स्तरीय समागम आज होने जा रहा है। कार्यक्रम की शुरुआत 1 बजे से होगी। कार्यक्रम सतगुरु उदय सिंह की अगवाई में किया जा रहा है। राज्य सरकार की तरफ से कैबिनेट मंत्री हरदीप सिंह मुडियां शामिल होंगे। वहीं हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी भी सतगुरु राम सिंह जी की जयंती के अवसर पर श्री भैणी साहिब में नतमस्तक होने आ रहे हैं। श्री भैणी साहिब के प्रवक्ता ने बताया कि हरियाणा के मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी के दफ्तर से उनके पहुंचने का कार्यक्रम आ चुका है और वो एक से दो बजे के बीच में श्री भैणी साहिब में पहुंचेंगे। श्री भैणी साहिब में सुबह से ही कीर्तन चल रहा है और संगत देश विदेश से आकर नतमस्तक हो रही है। श्री भैणी साहिब में बसंत पंचमी के मौके पर सतगुरु राम सिंह जी की जयंती पर राज्य स्तरीय समारोह करवाया जाता है। बसंत पंचमी के दिन हुआ था सतगुरु राम सिंह जी का जन्म सतगुरु राम सिंह जी का जन्म 3 फरवरी 1816 को बसंत पंचमी के दिन पंजाब के लुधियाना जिले के भैणी साहिब गांव में हुआ। वे सिखों के नामधारी संप्रदाय के संस्थापक और महान समाज सुधारक थे। उनका संपूर्ण जीवन सच्चाई, त्याग और सेवा को समर्पित रहा। नामधारी आंदोलन की स्थापना सतगुरु राम सिंह जी ने 1857 के बाद नामधारी आंदोलन को संगठित रूप दिया। इस आंदोलन का उद्देश्य सिखों को उनके मूल स्वरूप से जोड़ना, नाम-सिमरन, सादा जीवन और अनुशासन पर जोर देना था। नामधारी सिख सफेद वस्त्र, ऊंची पगड़ी और सख्त नैतिक आचरण के लिए जाने जाते हैं। यह आंदोलन आध्यात्मिक के साथ-साथ सामाजिक चेतना का भी केंद्र बना। अंग्रेजी शासन के विरुद्ध अहिंसक संघर्ष सतगुरु राम सिंह जी भारत में अहिंसक आंदोलन के प्रारंभिक प्रेरणास्रोत माने जाते हैं। उन्होंने अंग्रेज़ी शासन का विरोध बिना हथियार उठाए किया। विदेशी कपड़ों, अदालतों, शिक्षा व्यवस्था और अंग्रेज़ी संस्थानों के बहिष्कार का आह्वान किया। यह विचारधारा बाद में महात्मा गांधी के स्वदेशी और अहिंसा आंदोलन से मिलती-जुलती दिखाई देती है। सामाजिक सुधारों में योगदान सतगुरु राम सिंह जी ने समाज में फैली कई कुरीतियों के खिलाफ आवाज उठाई। उन्होंने नशाखोरी, मांसाहार, दहेज प्रथा, बाल विवाह और दिखावटी कर्मकांड का विरोध किया। स्त्रियों को सम्मान, शिक्षा और नैतिक स्वतंत्रता देने पर विशेष बल दिया। उनके प्रयासों से समाज में नैतिक सुधार और अनुशासन की भावना मजबूत हुई। स्वदेशी और आत्मनिर्भरता का संदेश सतगुरु राम सिंह जी स्वदेशी विचारधारा के प्रबल समर्थक थे। उन्होंने अपने अनुयायियों को स्वदेशी कपड़े पहनने, देसी उत्पाद अपनाने और स्थानीय कारीगरों को बढ़ावा देने की प्रेरणा दी। उनका मानना था कि आर्थिक आत्मनिर्भरता ही राजनीतिक स्वतंत्रता की नींव है। यह सोच अपने समय से काफी आगे थी। गिरफ्तार करके रंगून भेज दिया था ब्रिटिश सरकार उनके बढ़ते प्रभाव से चिंतित हो गई। 1872 में उन्हें गिरफ्तार कर रंगून (वर्तमान म्यांमार) निर्वासित कर दिया गया। निर्वासन के बावजूद उनके विचार और आंदोलन समाप्त नहीं हुए। उनके अनुयायियों ने पंजाब में उनके सिद्धांतों को जीवित रखा और आंदोलन को आगे बढ़ाया।


