भास्कर न्यूज | अमृतसर श्री राम शरणम आश्रम में परम पूज्य श्री स्वामी सत्यानंद जी महाराज का परमेश्वर से मिलन का शताब्दी साक्षात्कार समारोह किया गया। जिसमें राम भक्तों ने अपनी हाजिरी भरी। सबसे पहले वालिया ने संगत की तरफ से विमल गुप्ता, संजय धवन, अंचला वालिया के साथ मिलकर स्वामी जी महाराज के स्वरूप पर पुष्प अर्पित कर तिलक किया। इसके बाद वालिया ने स्वामी सत्यानंद जी महाराज के मुख से निकले शबद संगत को ग्रंथ से पढ़कर सुनाएं। जिसमें वालिया ने कहा कि महाराज जी ने संकल्प किया था कि जब तक उन्हें परम प्राप्ति नहीं हो जाती तब तक वह डलहौजी परम धाम पर एकाग्रचित बैठे रहेंगे। उन्हें इस स्थान पर साधना करते एक माह बीत गया है तो व्यास पूर्णिमा के दिन जब वह आंखें बंद किए हुए प्रार्थना करने में मग्न थे तो उन्हें राम शब्द बहुत ही सुंदर और आकर्षक स्वरों में सुनाई दिया। उन्होंने सोचा कोई प्राणी इधर-उधर राम नाम का उच्चारण कर रहा है। आंखें खोलीं तो कोई नजर नहीं आया। फिर आंखें बंद की तो वही मधुर स्वर राम-राम शब्द सुनाई दिया और साथ ही आदेशत्मक शब्द आया राम भज, राम भज, राम-राम। उन्होंने कहा कि ‘राम भज’ आदेश से परम प्रेरणा मिली। उन्होंने पहले तो उसे विघ्न समझा। किंतु वह शब्द तो था नहीं जिस प्रकार इस लोक में होता है।


