आखिरकार न्यायालय के हस्तक्षेप के बाद 16 जनवरी को श्वेताम्बर जैन महासंघ के 4 न्यासी के चुनाव हो रहे हैं। इस चुनाव में 13 उम्मीदवार ने पर्चा दाखिल कर दिया। नई सदस्यता की अंतिम तिथि अवधि समाप्त होने पर 1200 मतदाताओं की सूची पर चुनाव सम्पन्न होंगे। महासंघ की राजनीति के दो केंद्र बिंदु क्रमशः प्रकाश भटेवरा ओर विजय मेहता ही हैं। दोनों ही अपने सामाजिक रिश्तों के बूते पर समाज की शिखर पद के दावेदार हैं। श्वेताबर जैन समाज की सर्वोच्च संस्था महासंघ है, इसके अध्यक्ष बनने वाला काफी प्रभाव और रसूखदार माना जाता है। अंतिम दौर में इस बार भटेवरा और मेहता के बीच इस सीट पर जंग होना है। न्यासी संख्या को अपने पक्ष में बनाने के लिए दोनों अपने समर्थकों को जिताने की भरसक कोशिश कर रहे हैं। दोनों ओर से राजनीतिक वोट काटने वाली राजनीतिक चौसर भी रची गई, जिसके चलते उम्मीदवारों संख्या 13 हो गई है। समाजिक रसूख बनाए रखने में मेहता ओर भटेवरा की टीम ने विगत दिनों काफी मतदाताओं को जोड़ने की भरसक कोशिशें की। चल रहे राजनीतिक खेल जीत के बजाय जितने वाले को कमजोर करने के लिए दोनों गुट ने संपर्क वोट को एकपक्षीय बनाने और विरोधी पक्ष की लीड के अंतर पर फर्क डालने की भी चौसर बिछाई है। एक ऐसा उम्मीदवार है, जो चुनाव के पहले पायदान में विजय मेहता के रथ पर सवार थे, लेकिन जब उन्हें लगा कि यहां के बजाय वोट का खेल प्रकाश भटेवरा के रथ में ज्यादा बनेगा वो अब पाला बदल गए। इन प्रत्याशी के रंग बदलने को भी बड़ा राजनीतिक खेल माना जा रहा है। इस उम्मीदवार का पाला बदल खेल काफी चर्चा में है। उम्मीदवारों में पथ गच्छ और साधु संतों के अनुयायियों की छंटनी कर वोट समर्थन का खेल भी चल रहा है।


