अखिल भारतीय संघ के सह सरकार्यवाह अरुण कुमार ने कहा कि भारत का यह राष्ट्र किसी नए निर्माण का परिणाम नहीं है। यह राष्ट्र हजारों सालों की यात्रा का परिणाम है, और यह केवल कुछ समय के शासन से किसी का निजी राष्ट्र नहीं बन सकता। उन्होंने कहा कि राष्ट्रभक्ति केवल जय-जयकार में नहीं, बल्कि हर पल राष्ट्र और समाज के लिए जीने में है। यह बातें उन्होंने डेली कॉलेज में आयोजित संघ की “राष्ट्र सेवा के 100 वर्ष” के अर्दांजलि कार्यक्रम में कही। अरुण कुमार ने बताया कि आज सवाल उठता है कि भारत का राष्ट्र किसका है। उन्होंने स्पष्ट किया कि यह राष्ट्र उन लोगों का है जिन्होंने इसे बनाने, बनाए रखने और आगे बढ़ाने में भूमिका निभाई। यह सनातन, चिरंतर और हिंदू राष्ट्र है। उनके अनुसार राष्ट्रभक्ति का अर्थ हर पल समाज और राष्ट्र के लिए काम करना है, न कि केवल जय-जयकार करना। संघ में गीतों का महत्व अरुण कुमार ने कहा कि संघ में गीतों के बिना कार्यक्रम अधूरा है। उन्होंने बताया कि संघ में गीत परंपरा और भारत की सांस्कृतिक धरोहर से जुड़े हैं। गीतों ने संघ के कार्यक्रमों और संस्कृति के प्रसार में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई है। अरुण कुमार ने बताया कि संघ का निर्माण केवल संगठन बनाने के लिए नहीं, बल्कि समाज बनाने के लिए किया गया। उन्होंने कहा कि संघ हमेशा समाज की सेवा और उसकी उन्नति पर केंद्रित रहा है। समाज में कार्य करने वाले लोग दूसरों की मदद के लिए तत्पर रहते हैं, और यही संघ की प्राथमिकता है। संघ और देश की सर्वांगिक उन्नति अरुण कुमार ने आगे कहा कि संघ का उद्देश्य ऐसा समाज बनाना है जो धर्म, संस्कृति और राष्ट्र की सर्वांगिक उन्नति में योगदान दे। संघ का लक्ष्य देश को हर संकट से पार कराने और देश की प्रगति में मदद करना है। उन्होंने कहा कि यह संघ के संस्थापक की दूरदर्शिता और कल्पना का हिस्सा है।


