बार-बार हादसे…फिर जांच और फिर सख्ती व नियमों का पालन कराने के दावे। लेकिन अंत में सब नियम कागजों में दफन कर इस बार भी मनमर्जी से ग्वालियर व्यापार मेले में झूले लगा दिए गए हैं। झूला संचालकों ने सैलानियों की सुरक्षा को दरकिनार करते हुए खुद की सुविधा से बिना किसी दूरी के झूले लगाए हैं। वहीं, जिम्मेदार अधिकारियों ने भी ऐसे नियम उल्लंघन के बीच ही झूले चलाने के लिए एनओसी दे दी है। स्थिति यह है कि हर झूले के तीनों तरफ जहां 15-15 फीट की खुली गैलरी होनी चाहिए। वहीं ग्वालियर मेले में ऐसी कोई जगह नहीं छोड़ी गई। यानी कि किसी भी आपात स्थिति में बचाव दल, एंबुलेंस और फायर ब्रिगेड आदि के मूवमेंट में बड़ी परेशानियों का सामना करना पड़ेगा। एक-दूसरे से सटे झूले, वो भी ओवरलोड मेले में अब तक 32 झूले लग चुके हैं। अधिकांश झूले वालों के पास 2-2 प्लॉट हैं, जिनमें वे झूले के तीनों तरफ खुली जगह छोड़ी जा सके। लेकिन झूला संचालक खुली जगह नहीं छोड़ते और एक-दूसरे से सटाकर झूले लगाते हैं। ऐसा इसलिए ताकि दूसरे छोटे झूले वालों को बाकी जगह किराए पर दी जा सके। मेला प्राधिकरण सचिव और अधीनस्थ स्टाफ वसूली के खेल में इन सब नियमों को खूंटी पर टांग देते हैं। अफसरों की मिलीभगत के कारण संचालक झूलों को ओवरलोड भी चलाते हैं। जैसे कि नाव वाले झूलों में अधिकतम 50-55 लोगों को बिठाया जा सकता है। लेकिन संचालक 80 से 85 लोगों को फंसा-फंसाकर बिठाते हैं। सीधी बात – भास्कर सक्सेना, कार्यपालन यंत्री/ भारी मशीनरी संभाग एनओसी देकर अफसर बोले- मैं अभी छुट्टी पर हूं सवाल-झूलों को संचालन के क्या आपने एनओसी दे दी गई हैं?
जवाब-जिन लोगों ने नियमों का पालन किया, उन्हें एनओसी दी है। सवाल- झूलों के तीनों तरफ खुली जगह छोड़े जाने के नियम की क्या पूर्ति हो गई क्या?
जवाब- मैं अभी छुट्टी पर हूं।


