संत शिरोमणि महंत हरीगिरि महाराज ने गंगोत्री से लाया हुआ गंगाजल रामेश्वरम में अर्पित किया। इस अवसर पर उन्होंने कहा कि यह जल हमारी पवित्रता का प्रतीक है। महाराज ने इस दौरान ‘पवित्र जल, पवित्र जीवन, नशा मुक्त तन मन’ और ‘शिव की शक्ति, नशे से मुक्ति’ जैसे नारे लगाते हुए लोगों को नशे से दूर रहने का संदेश दिया। उन्होंने पवित्र जल को ‘अमृत जल’ बताते हुए नशामुक्ति के महत्व पर जोर दिया। संत ने शिक्षा के महत्व पर भी प्रकाश डाला। उन्होंने डॉ. अब्दुल कलाम का उदाहरण देते हुए कहा कि कलाम ने अपनी सादगी और कड़ी मेहनत से विज्ञान और राष्ट्र के प्रति समर्पण दिखाया। महाराज ने बताया कि कलाम का जीवन राष्ट्र के युवाओं को यह प्रेरणा देता है कि भौतिक सुख-सुविधाएं शिक्षा के रास्ते में बाधा नहीं हैं। उन्होंने जोर दिया कि आज के शिक्षित बच्चे ही कल के व्यवस्थापक और नागरिक होते हैं, इसलिए एक अच्छी शिक्षा व्यवस्था उज्ज्वल और प्रगतिशील भविष्य की गारंटी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा एक शक्तिशाली उपकरण है, जो व्यक्ति और राष्ट्र दोनों को बदल सकती है। यह एक मजबूत, न्यायपूर्ण और समृद्ध राष्ट्र के निर्माण के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। इस अवसर पर महाराज के शिष्य लालगिरि महाराज, भरतगिरि महाराज, जनवेदगिरि महाराज, गोविंदगिरि महाराज, जोगेंद्रगिरि महाराज, महादेवगिरि महाराज, नरेंद्रगिरि महाराज सहित सैकड़ों श्रद्धालु भी उपस्थित रहे।


