दुष्यंत कुमार |दुमका/ जामताड़ा दुमका समेत संताल परगना के सभी छह जिलों में अब तक निबंधित मजदूरों की संख्या मात्र 62,328 है। संथाल परगना में मजदूरों के निबंधन के मामले में सबसे बदतर स्थिति जामताड़ा जिले की है, जहां मात्र 410 मजदूर ही निबंधित हैं। वहीं, देवघर में मात्र 2164 मजदूर ही विभागीय स्तर पर निबंधित हैं। प्रमंडल में सबसे ज्यादा निबंधित मजदूरों की संख्या गोड्डा में है। इस जिले में 16781 मजदूर निबंधित हैं। पाकुड़ में 15873 मजदूर, दुमका में 14003 व साहिबगंज में 13097 मजदूर निबंधित हैं। यही वजह है कि दो दिन पूर्व दुमका में संपन्न संथाल परगना प्रमंडल स्तरीय बैठक के दौरान मंत्री संजय प्रसाद यादव जामताड़ा में पदास्थापित व देवघर में अतिरिक्त प्रभार में काम कर रहे श्रम अधीक्षक शैलेंद्र साह पर बिफर पड़े थे। समीक्षा के दौरान जब मंत्री की नजर जामताड़ा व देवघर में निबंधित मजदूरों की संख्या पर पड़ी तो उन्होंने श्रम अधीक्षक के कार्यशैली पर न सिर्फ असंतोष जताया, बल्कि उनके कामकाज की जांच के भी आदेश दिए । बहरहाल मंत्री के इस तेवर से श्रम विभाग के अधिकारियों में हड़कंप है। वहीं श्रम मंत्री संजय प्रसाद यादव ने कहा है कि अब बगैर निबंधन कराए कोई भी मजदूर राज्य से बाहर नहीं जाएं। इसके लिए उन्होंने पंचायत के मुखिया और वार्ड सदस्यों के कंधों पर भी जिम्मेवारी तय करने का निर्देश विभाग के अधिकारियों को दिया है। संथाल परगना के सभी छह जिलों में मृतक प्रवासी मजदूरों के स्वजन को मुआवजा मुहैया कराने के मामले में दुमका शीर्ष पायदान पर है। दुमका में 24 प्रवासी मजदूरों के मृत्यु होने का आवेदन विभाग को प्राप्त हुआ है, जिसमें 14 मामलों का िनपटारा करते हुए 17 लाख रुपए का मुआवजा भुगतान किया गया है। मुआवजा देने के मामले में जामताड़ा दूसरे स्थान है। इस जिले में 15 मामलों में 11 का निष्पादन किया गया है और 9.50 लाख रुपए मुआवजा िदया गया है। साहिबगंज में चार मामलों का आवेदन िमला है, जिसमें तीन मामलों का िनपटारा करते हुए 1.50 लाख रुपए भुगतान किया गया है। गोड्डा जिले में तीन मामलों में दो का निपटारा किया गया है और तीन लाख रुपए का भुगतान किया गया है। वहीं, देवघर और पाकुड़ जिले में एक भी मृतक प्रवासी मजूदरों का मामला विभाग तक नहीं पहुंचा है। बता दें कि श्रम विभाग के तय प्राविधानों के तहत बगैर निबंधित प्रवासी मजदूर के स्वजन को 50 हजार रुपए शव घर तक लाने व बतौर मुआवजा एक लाख रुपए दिए जाते हैं। वहीं, निबंधित प्रवासी मजदूरों के स्वजन को 50 हजार रुपए शव को घर तक लाने व बतौर मुआवजा 1.50 लाख रुपए िदए जाते हैं। श्रमिकों को मुआवजा के मामले में दुमका पहले, जामताड़ा दूसरे स्थान पर


