एसजेपी मेडिकल कॉलेज को खुले 6 साल हो गए हैं, जिसके अंतर्गत आने वाले संभाग के सबसे बड़े आरबीएम अस्पताल के हाल बेहाल हैं। यहां पहले से ही 123 डॉक्टरों के पद खाली हैं, अब सरकार ने 8 डॉक्टरों को ट्रांसफर करके हटा दिया है और लगाए सिर्फ 3 ही हैं। मेडिकल कॉलेज में 261 स्वीकृत पद हैं, जिनमें से अभी 140 डॉक्टर्स ही कार्यरत हैं। राजमेस के अधीन संचालित मेडिकल कॉलेजों में पदस्थापित चिकित्सक शिक्षकों के ट्रांसफर किए हैं, जिसमें 97 डॉक्टर्स शामिल हैं। इनमें से 3 डॉक्टर भरतपुर लगाए हैं, जिनमें माइक्रोबायोलॉजी के प्रोफेसर डॉ. अभिनीत महरोत्रा को डूंगरपुर से, असिस्टेंट प्रोफेसर माइक्रोबायोलॉजी की डॉ. प्रीति गर्ग को पाली से, नेत्र विभाग की डॉ. मोनिका अग्रवाल को अलवर से भरतपुर लगाया है। जिन्होंने ज्वाइन कर लिया है। वहीं 8 डॉक्टरों को भरतपुर से बाहर भेजा गया है। जिनमें भरतपुर मेडिकल कॉलेज से एसोसिएट प्रोफेसर जनरल मेडिसिन विभाग के डॉ. सुनील एरन, पैथोलॉजी विभाग के डॉ. नील शर्मा, असिस्टेंट प्रोफेसर बायोकेमिस्ट्री के डॉ. अवनीश शर्मा, शिशु रोग विभाग के डॉ. अरुण कुमार मीणा को अलवर लगाया है। एसोसिएट प्रोफेसर स्किन विभाग डॉ. सविता आर्य को बूंदी, असिस्टेंट प्रोफेसर जनरल मेडिसिन विभाग के डॉ. प्रतीक मंगल को धौलपुर, जनरल सर्जरी के डॉ. पवन कुमार को सवाईमाधोपुर, पीएसएम के डॉ. कमलेश नागरवाल को दौसा ट्रांसफर किया गया है और ये रिलीव भी हो गए हैं। हाल में लगाए 25 डॉक्टर्स में से 11 डॉक्टर्स ने भी नहीं किया ज्वाइन राजमेस ने हाल में नए 25 डॉक्टर लगाए भी थे, जिनमें से भी 11 डॉक्टर्स ने भी जॉइन नहीं किया है। लास्ट डेट 13 जनवरी तक 14 डॉक्टर्स ने ही ज्वाइन किया है। 25 डॉक्टर्स का पदस्थापन 9 दिसंबर 2024 को किया था, जिन्हें 15 दिन यानि 24 दिसंबर 2024 तक ज्वॉइनिंग करने का समय दिया गया था। जब डॉक्टर्स ने ज्वाइन नहीं किया तो डेट बढ़ाकर 13 जनवरी की गई, फिर भी 25 में से 14 डॉक्टरों ने ही ज्वाइनिंग दी है। फैकल्टी की कमी के कारण पिछले दिनों एनएमसी ने भी 3 लाख रुपए का जुर्माना लगाया था। सुपर स्पेशलिस्ट चिकित्सकों के पद भी हैं खाली मेडिकल कॉलेज में सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पद भी खाली चल रहे हैं। मेडिकल कॉलेज में 61 सुपर स्पेशलिस्ट डॉक्टर के पद स्वीकृत हैं, जिनमें से सिर्फ कार्डियोलॉजी और न्यूरोलॉजी के सुपर स्पेशलिटी के दो पद ही भरे हैं। बाकी 59 पद खाली हैं। ऐसे में यहां आने वाले रोगियों को लंबी कतारों में लगना पड़ रहा है। “ट्रांसफर वजह से 8 डॉक्टर्स रिलीवर हुए हैं, 3 नए ने ज्वाइन किया है बाकी रिक्त पदों को जल्दी भरने के प्रयास हैं। इससे पहले पदस्थापित 25 नए डॉक्टर्स में से 14 डॉक्टर्स ने ज्वाइन किया है, अन्य ज्वाइन करने ही नहीं आए।”
-डॉ. तरुण लाल, प्रिंसीपल, एसजेपी मेडिकल कॉलेज


