“मुश्किलों से कह दो उलझे नहीं हमसे, हमें हर हालात में जीने का हुनर आता है।” किसी शायर की ये पंक्तियां उपखंड क्षेत्र की ग्राम पंचायत गुरधा नदी के गांव नगला बंजारा की एक 14 साल की बेटी पायल पर बखूबी चरितार्थ होती दिख रही हैं। सिर से माता-पिता का साया उठने के बाद से पायल अपने चार छोटे भाई-बहनों और 75 साल की अपाहिज दादी की मां बनकर परवरिश कर रही है। इसके लिए पायल को अपनी पढ़ाई पांचवी के बाद छोड़नी पड़ी। खेलने- पढ़ने की उम्र में पायल अब घर गृहस्थी की सारी जिम्मेदारियों का बोझ उठाने को मजबूर है। दादी की वृद्धावस्था के कारण घर की साफ सफाई से लेकर सभी भाई बहनों का खाना बनाने तक की सारी जिम्मेदारी पायल निभा रही है। दो छोटी बहनों को भी स्कूल भेजती है। पेंशन के एक हजार रुपए पड़ते हैं नाकाफी, कभी-कभी भूखा सोना भी इस परिवार की मजबूरी सरकार-प्रशासन और भामाशाहों से मदद की दरकार… हर तरह से पात्र होने के बावजूद इस परिवार को अभी तक खाद्य सुरक्षा योजना का लाभ तक नहीं मिल पाया है। उपखंड प्रशासन की नजर भी इस जरूरतमंद परिवार तक नहीं पहुंच पा रही है। ऐसे में समाज के आर्थिक रूप से सक्षम भामाशाहों को आगे आकर परिवार की मदद को हाथ आगे बढ़ना चाहिए। 75 साल की दादी, पैरों से दिव्यांग, उनका जिम्मा भी पायल पर… टिनशेड की कोटरी जैसे घर में चूल्हे पर अपने भाई बहनों के साथ खाना पकाती पायल ने बताया उसके पिता राजू बंजारा की करीब 3 साल पहले टीबी की बीमारी से मौत हो गई थी। इसके बाद एक साल पहले मां सोनवती भी बीमारी से चल बसी। इससे बच्चे अनाथ हो गए। पायल ने बताया कि घर में उसका छोटा भाई सुनील (12), बहन करिश्मा (8), इच्छा (5) व परी (2-1/2) साल हैं। इसके साथ ही 75 साल की पैरों से दिव्यांग दादी अंगूरी है। दादी को हर महीने एक हजार रुपए वृद्धावस्था पेंशन मिलती है। बस केवल मात्र एक हजार रुपए ही उनके पूरे महीने के घर खर्च का सहारा हैं। गांव में कोई खेत जमीन भी नहीं है। महीने में कई दिन तो एक वक्त ही खाना खाकर काम चलाना पड़ता है। भाई सुनील पहले एक निजी स्कूलों में पढ़ता था, फीस नहीं देने के कारण स्कूल वालों ने उसका नाम काट दिया। सरपंच-कनिष्ठ लिपिक ने किया सहयोग बेसहारा अनाथ बच्चों का पता चलने पर तीन दिन पहले स्थानीय ग्राम पंचायत सरपंच मधु सुनील कटारा, ग्राम विकास अधिकारी विनोद कुमार और कनिष्ठ सहायक देवीसिंह मीना बच्चों के घर पहुंचे। उन्होंने अपनी ओर से बच्चों के खाने-पीने के लिए राशन सामग्री, सामान रखने के लिए दो बक्सों, गर्म कपड़ों, जैकेट, कंबल आदि की व्यवस्था की। सरपंच मधु सुनील कटारा ने बताया कि परिवार को पालनहार योजना से जोड़ने के प्रयास किये जा रहे हैं। इसके साथ ही नियमित अनाज राशन और बकरी पालन के लिए फिलहाल चार बकरियां उपलब्ध कराने का प्रयास किया जा रहा है। ताकि बालिग होने तक इन बच्चों के जीवन यापन की स्थाई व्यवस्था हो सके। सरपंच मधु कटारा ने कहा कि अगर भामाशाह इस मुहिम से जुड़ें, तो बच्चों के पालन पोषण में काफी मदद मिलेगी। उधर, कनिष्ठ लिपिक देवीसिंह मीना ने स्वयं दौड़ भाग कर इन बच्चों के आधार कार्ड, जन्म प्रमाण पत्र बनवाए हैं।


