संभाग के 12441 शिक्षक नहीं लगा रहे ई-अटेंडेंस:उज्जैन के  2133 शिक्षकों ने तो एक बार भी एप नहीं खोला, वेतन रोका

लाख कोशिशों के बाद भी सरकारी स्कूल के शिक्षक ई-अटेंडेंस लगाने को तैयार नहीं है। उज्जैन संभाग की बात करें तो यहां के 31466 शिक्षकों में से 12 हजार से ज्यादा पोर्टल पर उपस्थिति दर्ज नहीं करते। उज्जैन जिले के 2133 शिक्षक तो ऐसे है जिन्होंने अटेंडेंस के लिए अब तक एक बार भी एप नहीं खोला। इसको लेकर विभाग ने नवंबर का वेतन भुगतान रोक दिया। इधर, तनख्वाह नहीं मिलने पर शिक्षक संगठन पदाधिकारियों ने अफसरों को नियमों का हवाला देते हुए दबाव बनाने का प्रयास किया। इस पर विभाग ने अब दिसंबर माह में ई-अटेंडेंस लगाने का फाइनल अल्टीमेटम देकर होल्ड किया वेतन रिलीज करना शुरू कर दिया है, लेकिन इन्हें यह स्पष्ट किया जा रहा हैं कि दिसंबर माह का वेतन ई-अटेंडेंस के आधार पर ही मिलेगा। सख्ती शुरू होने के बाद ई-अटेंडेंस का आंकड़ा भी 5 दिन में करीब 10% बढ़ गया। नवंबर के अंतिम वर्किंग डे 28 नंवबर को 56.73% रही शिक्षकों की ई-अटेंडेंस 5 दिसंबर को बढ़कर 65.45 प्रतिशत हो गई। ई-अटेंडेंस लगाने वाले संभाग के 17850 शिक्षकों की संख्या अब 20 हजार 593 हो गई है। ई-अटेंडेंस से बचने इस तरह के बहाने 1. स्कूल के दूरस्थ इलाकों में नेटवर्क नहीं मिलता। इस कारण अटेंडेंस नहीं लगती।
2. स्कूल पहुंचने के बाद भी कई बार मोबाइल एप सही लोकेशन नहीं बताता।
3. एसआईआर सर्वे के कारण फिल्ड में काम करते। वहां से लोकेशन ट्रेस नहीं हो पाती। शाला प्रभारी भी नहीं मानते शिक्षा विभाग के आदेश उज्जैन संभाग में कुल 8753 स्कूलों में शाला प्रधान, एचएम या प्राचार्य है। इनमें से सिर्फ 54.48 प्रतिशत ने ही नवंबर में ई-अटेंडेंस लगाई। 46.52 प्रतिशत शाला प्रधान ने सरकार का ई-अटेंडेंस आदेश नहीं माना। उज्जैन जिले के कुल 1680 शाला प्रधानों में से नवंबर में सिर्फ 39.11 प्रतिशत (657) ने ही ई-अटेंडेंस लगाई। आगर-मालवा में सबसे अच्छा 69.34 प्रतिशत रहा। सख्ती के बाद 5 दिसंबर की ​स्थिति में संस्था प्रधान की उपस्थिति 10 प्रतिशत बढ़ते हुए 64.71 प्रतिशत हो गई। यहां भी उज्जैन 49.17 प्रतिशत के साथ संभाग में सबसे पीछे है। रतलाम 77.11 प्रतिशत के साथ सबसे आगे रहा। उज्जैन में पायलेट प्रोजेक्ट हुआ, यहीं फेल: इस साल ई-अटेंडेंस लागू करने से पहले सीएम के ग्रह जिले उज्जैन में इसका पायलेट प्रोजेक्ट हुआ था। यहां सफल होने के बाद ही इसे जुलाई माह से पूरे प्रदेश में लागू कर दिया गया, लेकिन ई-अटेंडेंस में अब उज्जैन जिला ही फिसड्डी हो गया। नवंबर अंत तक यहां के 42.8 प्रतिशत शिक्षक ही ई-अटेंडेंस लगा रहे थे। सख्ती के बाद 5 दिसंबर तो यह आंकड़ा बढ़कर 50.91 प्रतिशत हो गया। हालांकि यह आंकड़ा भी संभाग के 7 जिलों में सबसे कम है। अल्टीमेटम देने के बाद दे रहे वेतन कई बार समझाइश के बाद भी आधे से ज्यादा शिक्षक व संस्था प्रधान ई-अटेंडेंस नहीं लगा रहे है। इन सभी को नोटिस जारी कर दिया है। जिन 2133 ने अब तक एक बार भी मोबाइल से अटेंडेंस नहीं लगाई। उनकी वेतन होल्ड की थी। अब फाइनल अल्टीमेटम के साथ वेतन रिलीज कर रहे है।
-महेंद्र खत्री, प्रभारी डीईओ उज्जैन थोड़ी सख्ती के बाद सुधार होने लगा ^ ई-अटेंडेंस को लेकर लगातार निर्देश जारी हो रहे है। जिला स्तरों से अब थोड़ी सख्ती शुरू होने से इसमें सुधार होने लगा है। सबसे ज्यादा रतलाम जिले में तेजी से ई-अटेंडेंश का आंकड़ा बढ़ा है। संभाग में उज्जैन सबसे पीछे चल रहा है। इसमें सुधार के लिए भी प्रयास चल रहे है। नोटिस के बाद एप का उपयोग नहीं करने वाले 147 संस्था प्रधानों की संख्या भी अब घटकर 24 ही बची है।
-रमा नाहटे, प्रभारी संयुक्त संचालक संभाग उज्जैन सीख: 9539 अतिथि, 94% लगा रहे ई-अटेंडेंस, इन्हेंकोई परेशानी नहीं
ई-अटेंडेंस को लेकर अतिथि शिक्षक काफी अवेयर है। संभाग के कुल 7 जिलों में कार्यरत 9539 अतिथि है। इनमें से 94% से भी ज्यादा अतिथि शिक्षक ई-अटेंडेंस लगाते है। इसी के आधार पर इन्हें मानदेय का भुगतान होता है। इन्हें न तो नेटवर्क की दिक्कत आती है और न ही लोकेशन आ​​दि की।

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