संभाग-जिलों को खत्म करना सरकार का तुगलकी निर्णय: लोढ़ा:कहा- ऐसी क्या कंगाली आ गई कि सरकार को यह निर्णय करना पड़ा

पूर्व मुख्यमंत्री सलाहकार एवं पूर्व विधायक संयम लोढ़ा ने राज्य की भाजपा सरकार की ओर से पूर्ववर्ती कांग्रेस सरकार के समय बनाए गए जिलों और संभाग में से दस जिलों और तीन संभाग को खत्म करने के निर्णय का सरकार का तुगलकी फैसला करार दिया है। लोढ़ा ने यहां बयान जारी कर बताया कि भाजपा सरकार ने नववर्ष के आगमन से पहले पूर्ववर्ती सरकार के समय बनाए गए जिलों में से दस जिलों और तीन संभाग को खत्म करने का जो तुगलकी फैसला लिया है, उसका वे कड़ा विरोध करते है। लोढ़ा ने कहा कि राज्य की अशोक गहलोत सरकार ने जनता को न्याय पहुंचाने और प्रशासन की सुविधाओं का लाभ पहुंचाने की मंशा से जो कदम उठाया गया था, उसमें यह बाधा खड़ी करने का प्रयास है। लोढ़ा​​​​​​​ ने कहा कि राज्य के कानून मंत्री का तर्क है कि जिन जिलों को खत्म किया जा रहा है उसमें इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं था, इसलिए यह निर्णय लेना पड़ा। जब कोई नया जिला बनाया जाता है तो वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर नहीं होता है, वहां इन्फ्रास्ट्रक्चर बनाना पड़ता है। अब तो केन्द्र और राज्य में डबल इंजन की सरकार है। केन्द्र सरकार भी उदारता के साथ राज्य सरकार को पैसा दे रही है, तो ऐसी क्या कंगाली आ गई कि सरकार को यह निर्णय करना पड़ा। लोढ़ा ने कहा कि जिले में अब आबूरोड के किसी व्यक्ति को संभागीय आयुक्त न्यायालय जाना पड़ेगा तो उसे एक सौ किलोमीटर ज्यादा जाना पड़ेगा। सांचौर के आसपास के व्यक्ति का जिला स्तरीय कार्य सांचौर में ही हो सकता था, उसे अब जालौर जाना पडे़गा। लोढ़ा ने कहा कि देश में 8.96 किलोमीटर का भी जिला है, तो फिर किन तर्को के आधार पर सरकार इस तरह का तुगलकी फैसला ले रही है। लोढ़ा ने मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा से आम लोगों के हित और उनकी सुविधाओं के लिए इस निर्णय को वापस लेने की मांग के साथ साथ राज्यपाल से भी इसमें हस्तक्षेप करने की मांग की है।

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