संयुक्त किसान मोर्चा ने दिया ज्ञापन:2023 की खरीफ की फसल का बीमा नहीं देने पर आंदोलन की चेतावनी

संयुक्त किसान मोर्चा के राष्ट्रीय आह्वान पर नागौर व खींवसर में संयुक्त किसान मोर्चा के बैनर तले भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) की नागौर शाखा ने राष्ट्रपति के नाम ज्ञापन दिया। मोर्चा ने ज्ञापन देकर 2023 की खरीफ की फसल का बीमा क्लेम जारी करवाने की मांग की है। संयुक्त किसान मोर्चा ने राष्ट्रपति‌ को‌ दिए ज्ञापन में 26 दिन से भूख हड़ताल पर किसान नेता जगजीत सिंह दल्लेवाल की जान बचाने, दिल्ली कूच करने वाले किसानों पर दमन बंद करने, नोएडा व ग्रेटर नोएडा के सभी किसानों को जेल से रिहा करने, राष्ट्रीय कृषि बाजार नीति वापस लेने, C2 + 50 फार्मूले के साथ MSP लागू करने की मांग की है। भारतीय किसान यूनियन (टिकैत) के जिलाध्यक्ष अर्जुनराम लोमरोड़ ने बताया कि देश के किसान लंबे समय से एमएसपी कानून बनाने की मांग कर रहे हैं, 11 महीने लंबा आंदोलन चला। किसानों को सरकार ने वादा करके आंदोलन खत्म किया था, परंतु केंद्र सरकार अपने वादे से मुकर गई इसलिए अन्नदाता अपनी हक की लड़ाई के लिए आज भी आंदोलनरत हैं। तथा केंद्र सरकार हठधर्मिता के साथ पूंजीपतियों को फायदे पहुंचाने के लिए नए-नए कानून बना रही है। इसी विरोध में पूरे देश भर में किसान दिवस के अवसर पर किसान ज्ञापन देकर अपना विरोध जता रहे हैं। जिलाध्यक्ष लोमरोड़ ने बताया कि 2023 में कटाई से पहले तक बारिश नहीं होने के कारण पूरे जिले में मूंग की फसल का उत्पादन बहुत कम रहा। किसानों ने प्रधानमंत्री फसल बीमा योजना के तहत बीमा करवा रखा था। बीमा कंपनी ने ज्यादातर फसल कटाई प्रयोगों पर झूठी आपत्तियां दर्ज करवाई, जो निराधार है। जिला शिकायत निवारण समिति ने कंपनी की लगाई गई आपत्तियों को झूठा मानकर 3 बार आपत्तियां हटाकर कृषि विभाग जयपुर भेज दी हैं, लेकिन अभी तक क्लेम जारी नहीं हुआ है। किसानों ने राज्य सरकार को चेतावनी दी है कि खरीफ की 2023 की फसल का क्लेम जल्द दिया जाए। अब कृषि आयुक्तालय जयपुर में सुनवाई बाकी है। लोमरोड़ ने बताया कि अगर समय पर आपत्तियां नहीं तोड़ी गई तो जिले के किसान बहुत बड़ा आंदोलन और धरना प्रदर्शन करेंगे। ज्ञापन देने के दौरान देवाराम जांगू, मूलाराम गोदारा, हनुमान राम माचरा, जेठाराम माचरा, हिम्मताराम जांगू, रेखाराम गोदारा, जगदीश राम जांगू, कुंभाराम, दीपाराम, सुंडाराम, मेघाराम, नंदलाल, चूनाराम आदि मौजूद थे।

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