संवार रहे नॉर्थ ईस्ट की बच्चियों का जीवन..:रायपुर में 5 किलो वजनी कुबेर का लड्डू ‌2.31 लाख रुपए में नीलाम, ये पढ़ाई-पोषण पर खर्च होंगे

2 लाख 31 हजार रुपए… है कोई और! बोली लगाइए! कोई आवाज नहीं आ रही! तो 2 लाख 31 हजार एक… दो… और तीन! ‘कुबेर का लड्डू’ नीलाम हुआ। यह नजारा राजधानी रायपुर के डीडीयू नगर में शबरी कन्या आश्रम का था। रविवार को आश्रम में 5 किलो के एक लड्डू की नीलामी हुई। सबसे अधिक बोली लगाकर रायपुर के व्यवसायी आत्मबोध अग्रवाल ने बूंदी के इस लड्डू को अपने नाम किया। इस कवायद का मकसद छत्तीसगढ़ में रह रही पूर्वोत्तर के राज्यों की जनजातीय बच्चियों की शिक्षा और पोषण के लिए फंड जुटाना है। ताकि हिंसा और दूसरी वजहों से पलायन का दर्द झेलने वालीं बच्चियों का जीवन यहां संवारा जा सके। नीलामी रविवार दोपहर 1:45 बजे शुरू हुई। बोली की शुरुआत 10 हजार रुपए से हुई। अंतिम बोली तीन बजे लगी। झारखंड के चतरा से कौशल्या देवी ने भी इस लड्डू को पाने के लिए मोबाइल पर 59,100 रु. की बोली लगाई। इस बार 80 लोगों ने ही बोली लगाई। इसमें महिलाओं की संख्या अधिक रही। संस्था के सहयोगियों और दानदाताओं के लिए पारिवारिक मिलन की तरह कार्यक्रम का आयोजन किया जाता है। इसमें कोई व्यक्ति सहयोग के लिए शामिल हो सकता है। इसके लिए समिति के कार्यकर्ता नीलामी में आए सभी लोगों को एक-एक पर्ची बांटते हैं। परंपरा: 32 साल से मकर संक्रांति के बाद पहले रविवार को नीलामी
वनवासी विकास समिति 32 साल से आश्रम में लड्डू नीलाम करने की परंपरा निभा रही है। इसकी शुरुआत 1993 में हुई थी। महाराष्ट्र की माधवी जोशी ने असम से 8 बच्चियों को यहां लाकर 1984 में किराए के मकान में आश्रम शुरू किया। आर्थिक तंगी के कारण इसे बंद करने की नौबत आ गई। तब नीलामी शुरू हुई। पहली नीलामी में 50 हजार रुपए जुटे। लड्डू खरीदने वाले को आयकर छूट मिलती है।

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