पुलिस के बाद अब वनरक्षक भर्ती में बड़ी गड़बड़ी:डिजिटल के बजाए अपनों का मैनुअल फिजिकल, रात में भी दौड़े प्रतिभागी

पुलिस भर्ती के बाद अब वनरक्षक भर्ती में बड़ी गड़बड़ी सामने आई है। वन विभाग ने मई 2024 में 1484 वनरक्षक पदों के लिए भर्ती निकाली थी। नियमों के तहत पहले फिजिकल टेस्ट होना है। पास करने वाले लिखित परीक्षा में बैठेंगे। 4 लाख 32 हजार लोगों ने फॉर्म भरे। 16 नवंबर से जिलों में फिजिकल टेस्ट शुरू हुए। शासन ने आदेश दिया था कि सभी अभ्य​र्थियों को ​​डि​जिटल डिवाइस पहनकर लंबी कूद, गोला फेंक में भाग लेना होगा। फिजिकल टेस्ट दिन में किए जाएंगे। लेकिन कई जिलों में इन नियमों का उल्लंघन हुआ। बगैर ​​डिवाइस पहनाए ही टेस्ट मैनुअल कराए गए। कई जगह तो रात के अंधेरे में भी फिजिकल टेस्ट ले लिया गया। कुछ प्रतिभागियों का आरोप है कि अधिकारियों ने अपनों को मौका देने के लिए ऐसा किया। प्रतिभागी रिजल्ट खराब किए जाने के डर से अभी सामने नहीं आ रहे हैं। इसकी शिकायत अपर मुख्य सचिव ऋचा शर्मा से की गई है। भास्कर ने जब डीएफओ से बात की तो उन्होंने स्वीकारा कि फिजिकल टेस्ट दिन डूबने और मैनुअल करवाए गए हैं। हैदराबाद की कंपनी को ठेका:​मार्च 2024 से वनरक्षक भर्ती प्रक्रिया शुरू हुई। फिजिकल टेस्ट के लिए डिजिटल डिवाइस के साथ कराने का टेंडर नवंबर में हैदराबाद की कंपनी टाइमिंग टेक्नोलॉजी इंडिया प्राइवेट लिमिटेड को 224 रुपए प्रति उम्मीदवार के हिसाब से काम दिया गया। 16 नवंबर को बीजापुर, दंतेवाड़ा और रायगढ़ में फिजिकल टेस्ट शुरू हुए तो कंपनी के कई ​​डिवाइस काम नहीं कर रहे थे। रायगढ़ में तो प्रतिभागियों ने बवाल किया। रायगढ़ डीएफओ ने पत्र लिखकर शिकायत की कि सुबह 6 बजे से टेस्ट शुरू होना था, लेकिन 9:15 बजे तक केवल एक ​​डिवाइस ही स्टार्ट हुई। रात 11:30 बजे तक टेस्ट चलते रहे और 266 प्रतिभागियों का ही फिजिकल हो पाया। अभी नहीं है। जिलों से एकत्र करने को कहा गया है। पहले दिन समस्या आई थी। वहां परमिशन देकर मेनुअली कराया गया। फिजिकल टेस्ट कृत्रिम प्रकाश में हुआ, इस बारे में कुछ नहीं बता पाऊंगा। जो भी हुआ है अनुमति लेकर किया गया है।
नावेद, एडिशनल पीसीसीएफ ऐसे समझें गड़बड़झाला पारदर्शिता के नियम टूटे नियम- मशीनों से दौड़,लंबी कूद व गोला फेंक को नापें
यह नियम एक्यूरेसी और पारदर्शिता के लिए किया था। मेजुअल फिजिकल कराए जाने पर एक्यूरेसी नहीं आ सकती। डिजिटल के साथ मैनुअल का रिजल्ट बनेगा तो गड़बड़ी की आशंका है।
​नियम- सूर्य की रोशनी में ही हो फिजिकल टेस्ट
यह नियम इसलिए था ताकि रिजल्ट में स्पष्टता नजर आए। पहले दिन तो रोशनी का इंतजाम भी नहीं किया गया था। अंधेरे में अंदाज के साथ रिजल्ट तैयार किया गया। नियम- बदलाव कर शासन को इस बारे में बताया जाना ​​था
जिलों से शिकायत आने के बाद अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक प्रशासनिक ने एक कमेटी बनाई। इसने नियम बदले और बिना शासन को बताए जिलों मंे आदेश कर दिए। जिसमें मेनुअल और रात में कृत्रिम प्रकाश में टेस्ट लेने की अनुमति दे दी गई। हर सर्किल में 50-60 हजार अभ्यर्थी आए ​​​​​​​​​​​​​​कंपनी को भुगतान की तैयारी​​​​​​​ प्रत्येक जिले से शिकायतों के बावजूद विभाग टीटीआईपीएल को 10 करोड़ रुपए भुगतान की तैयारी में है। हर जिले से उसके बिल मंगाए जा रहे हैं। जहां मेनुअल हुआ है, कंपनी वहां का भी बिल लगा रही है। हर जिले में पहले दिन कोई न कोई समस्या आई, उसके बावजूद कंपनी पर कोई कार्रवाई नहीं की गई। कंपनी की मदद करने के लिए मेनुअल फिजिकल का आदेश दे दिया गया।​​​​​​​ सीधी बात – मॉरिश नंदी, अपर प्रधान मुख्य वन संरक्षक क्या मैनुअल फिजिकल टेस्ट भी हुए हैं?
कहीं इंटरनेट काम नहीं कर था, वहां मैनुअल टेस्ट लिया गया। अधिकतर जगह डिजिटल ही हुआ है।
डीएफओ ने शिकायत की- मशीन काम नहीं कर रही, सूर्य ढलने पर भी टेस्ट हुए?
हां, कुछ जगहों से शिकायत मिली थी तो वहां छूट दी गई थी। जहां तक कृत्रिम प्रकाश की बात है, तो उसमें तो टेस्ट हो ही नहीं सकता।
ऐसा आदेश डीएफओ को जारी हुआ था?
मैंने ऐसा कोई आदेश नहीं दिया। भर्ती को नावेद देख रहे हैं आप उनसे बात कर लें जिम्मेदार बोले… लंबी कूद की मशीनें खराब थी तो हमने मैनुअल किया था। प्रतिभागियों से सहमति भी ली थी। इसके हमारे पास सीसीटीवी फुटेज भी है। – जाधव सागर, डीएफओ, दंतेवाड़ा​​​​​​​ सर्दी के मौसम में सूर्य की रोशनी जल्दी चली जाती है। प्रतिभागियों की संख्या अधिक थी, इसलिए सूर्यास्त के बाद भी टेस्ट चला।- तेजस शेखर, डीएफओ, ​अंबिकापुर पहले दिन लंबी कूद की मशीनें काम नहीं कर र​ही थीं। इसकी शिकायत उच्च अधिकारियों से की गई थी। सूर्यास्त के बाद टेस्ट चला। -शशि कुमार, डीएफओ, कवर्धा

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