संसद के सामने आत्मदाह करने वाले बागपत के छात्र जितेंद्र की शुक्रवार को मौत हो गई। दिल्ली में बुधवार को उसने खुद पर मिट्टी का तेल डालकर आग लगा ली थी। 95% झुलस गया था। राम मनोहर लोहिया अस्पताल में इलाज हुआ, लेकिन डॉक्टर नहीं बचा सके। जितेंद्र के परिवार को उसका शव सौंप दिया गया है। भीम आर्मी प्रमुख और नगीना से सांसद चंद्रशेखर आजाद ने घटना को लेकर योगी सरकार और प्रशासन पर निशाना साधा। उन्होंने कहा- यह केवल एक आत्मदाह नहीं, बल्कि योगी सरकार और प्रशासन पर करारा तमाचा है। यह घटना न्याय प्रणाली और सामाजिक समानता की हत्या है। क्या दलित समाज को न्याय मांगने का भी अधिकार नहीं है? जितेंद्र का घर बागपत जिला मुख्यालय से 40 किलोमीटर दूर छपरौली में है। दैनिक भास्कर की टीम गुरुवार को जितेंद्र के घर पहुंची थी। उसके परिवार वालों ने कहा कि गांव के दबंगों ने हम लोगों को परेशान करते थे। हमारे बेटों पर गंदे कमेंट करते थे। कई बार शिकायत की लेकिन सुनवाई नहीं हुई। इसी से परेशान होकर जितेंद्र ने आत्मदाह कर लिया। जितेंद्र के घर से रिपोर्ट पढ़ने से पहले इस पोल पर अपनी राय दें… जितेंद्र (35) के घर में दो बड़े भाई (रवींद्र ओर शीलू), मां ओमी और पिता महिपाल हैं। तीन बहनों की शादी हो चुकी है। जितेंद्र एलएलबी, फर्स्ट ईयर का छात्र था। जिस विवाद की वजह से जितेंद्र ने संसद के सामने आत्मदाह किया। वो साल 2021 में शुरू हुआ था। जिनसे लड़ाई, वो ऊंची जाति वाले
घर पर जितेंद्र के भाई शीलू मिले। उन्होंने कहा- हम लोग दलित परिवार से हैं। जिनसे हमारा विवाद है, वह ऊंची जाति के हैं। तभी हमारी सुनवाई नहीं हो रही थी। हमारे पड़ोसी विक्की ने साल 2020 में अवैध शराब बेचना शुरू किया था। वो घर से ये काम करता था। इस वजह से मोहल्ले का माहौल खराब रहता था। हम लोग इसका विरोध करते थे, फिर भी वो नहीं मान रहा था। उसको अपने चचेरे भाई कविंदर का सपोर्ट है। कविंदर होमगार्ड है। वे दोनों दबंगई के साथ शराब बेचने का काम कर रहे हैं। पिता के साथ रोड पर मारपीट की
इसी झगड़े को लेकर विक्की ने साल 2021 में मेरे पापा महिपाल के साथ सड़क पर मारपीट की थी। हमने पुलिस से शिकायत की। लेकिन हमारा केस दर्ज नहीं किया गया। पुलिस ने उल्टा जितेंद्र और पापा के ऊपर मारपीट का केस दर्ज कर दिया। वो लोग हमेशा हमारे परिवार पर दबाव बनाकर रखते थे। हालत यह हो गई थी हम लोग घर से निकलते तो हम पर कमेंट करते। हमारा जीना मुश्किल हो गया था। दबंगों ने पापा-जितेंद्र को जेल भिजवाया
जितेंद्र को यह सब खराब लगता था। साल 2022 में दबंगों ने फिर से हमारे परिवार के साथ मारपीट की। लेकिन इस बार भी केस हम लोगों पर ही दर्ज हुआ। मतलब हम लोग मार भी खाते थे। दूसरा यह कि पुलिस भी हमें ही गाली देती थी। हम लोग इस चीज से बहुत परेशान थे। धीरे-धीरे हमारा यहां रहना मुश्किल हो रहा था। हम लोग गरीब परिवार से हैं। भट्टे पर काम करके घर चलाते हैं। लेकिन ये लोग हमें काम ही नहीं करने देते थे। एक बार तो इन लोगों ने जितेंद्र और पापा को जेल भी भिजवा दिया था। साल 2024 मई में जब हमने विक्की और उसके भाई पर मारपीट का केस दर्ज करवाया तो पुलिस ने दोनों को थाने से ही जमानत दे दी थी। हफ्ते भर से काफी परेशान था जितेंद्र
भाई के मुताबिक, पुलिस हमारी सुनवाई नहीं कर रही थी। इससे विक्की और उसके होमगार्ड भाई को बल मिल रहा था। वो लोग खुलेआम हम लोगों को धमकाते। कहते- तुम लोग हमारा कुछ नहीं कर पाओगे। जितेंद्र को ये सब ज्यादा परेशान करते थे। 1 हफ्ते से वो बहुत परेशान था। घर में वो किसी से बात नहीं कर रहा था। खाना भी कम खाता था। दिल्ली जाने की बात उसने घर पर बताई थी। लेकिन, ये नहीं पता था कि वो खुद को आग लगाने जा रहा है। हमको तो दिल्ली पुलिस ने फोन करके घटना की जानकारी दी थी। दूसरे पक्ष ने बात करने से मना किया
जिन लोगों से जितेंद्र के परिवार का विवाद चल रहा है, उनका घर जितेंद्र के घर से 200 मीटर की दूरी पर है। दैनिक भास्कर की टीम उनके घर भी पहुंची। लेकिन उन लोगों ने बात करने से साफ मना कर दिया। कोर्ट में चार्जशीट भेजी गई है- एसपी
मामले में एसपी अर्पित विजयवर्गीय ने बताया- घटना की जानकारी के बाद हम लोगों ने जितेंद्र के परिवार से संपर्क किया। जितेंद्र और उसके परिवार पर मारपीट के केस साल 2021 और 2022 में दर्ज किए गए थे। साल 2024 में जितेंद्र के परिवार ने भी मारपीट का केस दर्ज करवाया है। इन सभी मामलों में कोर्ट में चार्जशीट भेजी गई है। वहां कार्रवाई चल रही है। समाज कल्याण विभाग द्वारा जितेंद्र के परिजनों को आर्थिक धनराशि अनुदान के रूप में दी जा रही है। मामले की जांच के लिए एडिशनल एसपी को आदेश दिए गए हैं। सांसद चंद्रशेखर आजाद ने कहा- ये सिर्फ आत्मदाह नहीं, सरकार पर करारा तमाचा है ———————————-
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