भास्कर न्यूज | बालोद ग्राम बिरेतरा में तीन दिवसीय पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ एवं प्रज्ञापुराण कथा का समापन हुआ। पहले दिन मंगल कलश यात्रा निकाली गई। पीतवस्त्रधारी महिलाओं ने भाग लिया। यज्ञाचार्य राजेंद्र कुमार सिन्हा ने कहा कि भारतीय संस्कृति में यज्ञ को पिता और गायत्री को माता कहा गया है। इनके सान्निध्य से मनुष्य श्रेष्ठ संस्कारवान बनता है। संस्कारहीन जीवन पशु तुल्य हो जाता है, इसलिए संस्कारों की प्रक्रिया गर्भाधान से लेकर अंतिम संस्कार तक निरंतर चलती रहती है। संस्कार ही मनुष्य को महान बनाते हैं। संस्कारहीन व्यक्ति पशु समान होता है। प्रवचन के दौरान कथावाचक हेमंत व्यास ने गायत्री मंत्र एवं यज्ञ की गरिमा बताई। उन्होंने कहा कि गायत्री महामंत्र का जप, लेखन, नियमित हवन, गायत्री चालीसा पाठ एवं उपवास जैसे साधन आत्मकल्याण के साथ-साथ विश्व कल्याण का मार्ग प्रशस्त करते हैं। व्यक्ति निर्माण से ही युग परिवर्तन संभव है। गायत्री परिवार के ब्लॉक समन्वयक लोचनराम साहू ने कहा कि ऐसे यज्ञ आयोजन प्रत्येक गांव में होने चाहिए, जिससे वातावरण पवित्र होता है। ग्राम प्रमुख प्रकाश साहू, सरपंच टेमन लाल साहू, घनसू साहू, देवलाल साहू, अरुण साहू, मुकेश साहू, देवधर साहू, नरेश कुमार साहू, मानसिंह साहू, विनोद कुमार साहू आदि मौजूद थे। अपनी बुराइयों को त्यागने का संकल्प लिया गया दूसरे दिन प्रज्ञापुराण कथा के साथ सायंकालीन दीपयज्ञ किया गया। ईश्वर उपासना, जीवन साधना एवं राष्ट्र सेवा को भगवत प्राप्ति के आवश्यक साधन बताया गया। तीसरे दिन सुबह ध्यान साधना के उपरांत देवस्थापना के साथ पांच कुंडीय गायत्री महायज्ञ का शुभारंभ हुआ। यज्ञ में सद्बुद्धि एवं उज्ज्वल भविष्य के लिए गायत्री मंत्र एवं महामृत्युंजय मंत्र की विशेष आहुति दी। श्रद्धालुओं ने अपनी बुराइयों को त्यागने का संकल्प लिया। इस अवसर पर दीक्षा संस्कार एवं गर्भवतियों के पुंसवन संस्कार भी कराए गए।


