अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई को लेकर कलेक्टर कौशेंद्र विक्रम सिंह ने मंगलवार को सख्ती दिखाई। टाइम लिमिट बैठक में सभी एसडीएम को सख्त निर्देश दिए। कहा कि आदेश के बावजूद पिछले 10 दिनों से कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया। जिन कॉलोनियों पर आदेश पारित हो चुके हैं, उनमें अब तक एफआईआर क्यों दर्ज नहीं हुई, यह स्पष्ट किया जाए। कलेक्टर ने कहा कि जब 113 से अधिक अवैध कॉलोनियों की सूची तैयार है, तो कार्रवाई में देरी क्यों हो रही है। उन्होंने एसडीएम से कहा कि इस पूरे मामले की मॉनीटरिंग वे खुद करेंगे। कलेक्टर ने एसपी देहात को फोन कर थानों में भेजे गए आवेदनों पर एफआईआर न होने की वजह पूछी और निगरानी के निर्देश दिए। कलेक्टर ने कहा कि जब तक अवैध कॉलोनियों के नए नियम लागू नहीं होते, तब तक पुराने प्रावधानों के तहत सख्त कार्रवाई की जाए। प्रशासन को लगातार शिकायतें मिल रही हैं कि बिल्डर सस्ती कृषि भूमि खरीदकर खेतों में मुरम डालकर प्लॉट काट रहे हैं और कॉलोनी बताकर बेच रहे हैं। कई जगह सड़क, नाली, बिजली और पानी जैसी बुनियादी सुविधाएं नहीं हैं, फिर भी प्लॉट ऊंचे दामों पर बेचे जा रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, इससे आम लोग भविष्य में रजिस्ट्री और सुविधाओं की गंभीर समस्याओं में फंस सकते हैं। इसी को देखते हुए जांच के लिए टीमें बनाई गई हैं। डोर-टू-डोर जाएं अफसर कलेक्टर ने नगर निगम आयुक्त और ग्रामीण क्षेत्र के लिए जिला पंचायत सीईओ को नोडल अधिकारी बनाने के निर्देश दिए। उन्होंने शिविरों की तिथि तय करने और पात्र हितग्राहियों की पहचान के लिए डोर-टू-डोर अभियान चलाने को कहा। अभियान की समीक्षा टीएल बैठक में कलेक्टर ने ‘संकल्प से समाधान’ अभियान की जानकारी ली। यह अभियान 12 जनवरी से 31 मार्च 2026 तक चलेगा। इसका उद्देश्य पात्र हितग्राहियों तक केंद्र और राज्य सरकार की योजनाओं का लाभ पहुंचाना है।


