भास्कर न्यूज | राउरकेला रेलनगरी के नाम से पहचाने जाने वाला बंडामुंडा इन दिनों धूल की मोटी परतों में ढंका नजर आ रहा है। सड़कों पर उड़ती धूल यहां के लोगों की दिनचर्या का हिस्सा बन चुकी है। हालात ऐसे हैं कि घर से बाहर निकलते समय लोग मुंह पर गमछा या कपड़ा बांधकर निकलने को मजबूर हैं। दृश्य ऐसा प्रतीत होता है मानो लोग गर्मी के मौसम में लू से बचाव कर रहे हों, जबकि असल वजह सड़कों से उड़ रही बेतहाशा धूल है। स्थानीय लोगों का कहना है कि सड़कों पर जमी धूल और नियमित पानी के छिड़काव के अभाव में दिनभर धूल का गुबार हवा में तैरता रहता है। बाजार क्षेत्र, रेलवे कॉलोनियों और मुख्य मार्गों पर भी यही स्थिति बनी हुई है। इससे राहगीरों, स्कूली बच्चों और बुजुर्गों को सांस लेने में परेशानी हो रही है। आसपास रहने वाले लोग चर्म रोग और अस्थमा जैसी बीमारियों की शिकायत भी करने लगे हैं। लोगों के बीच चर्चा है कि धूल के मामले में बंडामुंडा अब ओडिशा की खान नगरी कोईड़ा और बड़बिल से कम नहीं रह गया है। नागरिकों का आरोप है कि जिला प्रशासन इस गंभीर समस्या की ओर अपेक्षित ध्यान नहीं दे रहा है। स्थानीय लोगों ने प्रशासन से नियमित पानी का छिड़काव, सड़कों की मरम्मत और निर्माण स्थलों पर धूल नियंत्रण के ठोस उपाय लागू करने की मांग की है।


