अब तक 13 आरोपी हो चुके गिरफ्तार, इनमें 5 से 6 स्टूडेंट शहर की कारोबारी महिला को डिजिटल अरेस्ट कर 1.60 करोड़ ठगने के मामले में बुधवार को क्राइम ब्रांच ने यूपी से दो आरोपियों को और गिरफ्तार किया है। एक आरोपी कपड़े का होलसेल व्यापारी है, दूसरा बी. कॉम का छात्र है। दोनों ने ऑनलाइन ठगी करने वाली गैंग को अपना करंट व सेविंग अकाउंट ठगी के रुपए ट्रांसफर करने के लिए दिया था। पड़ताल में चौंकाने वाली बात यह सामने आई है कि इन दोनों के खातों में गैंग द्वारा 12 राज्यों में की गई ठगी के 1 करोड़ 66 लाख रुपया भी ट्रांसफर हुए थे। ये पैसे दो दिन इनके खाते में रहे।
एडिशनल डीसीपी क्राइम ब्रांच राजेश दंडोतिया ने बताया कि गिरफ्तार आरोपी का नाम मनोज कुमार (30) निवासी श्रावस्ती और आगम साहनी (21) लखनऊ है। पूछताछ में मनोज ने बताया कि गैंग के संपर्क में आने पर उसने 3 लाख रुपए के लालच में अपनी फर्म का करंट अकाउंट किराए पर दे दिया था। दूसरा आरोपी आगम साहनी गैंग के लिए एजेंट के रूप में काम करता है। इसका टेलीग्राम पर लोगों को कमीशन का लालच देकर उनके खाते किराए पर लेने का काम है। इंदौर से 25 लाख इनके खातों में गए, तीन लाख में दिए थे अकाउंट दोनों आरोपियों को गैंग ने 3 लाख का कमीशन दिया था। 2 लाख मनोज को करंट खाता देने और आगम को 1 लाख रुपए व्यापारी का खाता उपलब्ध करवाने के मिले थे। इंदौर की वंदना गुप्ता से हुई 1.60 करोड़ की ठगी में से 25 लाख रुपए इनके बैंक खातों में भी ट्रांसफर हुए थे। पुलिस को गुमराह करने के लिए इन्होंने मोबाइल सिम तोड़कर फेंक दी थी।
इन राज्यों से ठगी के रुपए आ रहे थे खातों में : बैंक खातों की लिंक जांचते हुए क्राइम ब्रांच जब आरोपियों तक पहुंची तो ये पता चला कि दोनों के खातों में 12 और 13 नवंबर को दो दिन में 1 करोड़ 66 लाख रुपए का ट्रांजेक्शन ठग गैंग ने किया था। यह रुपए गैंग ने बिहार, गुजरात, हरियाणा, मेघालय, एमपी, तमिलनाडु, पश्चिम बंगाल, असम, केरल, महाराष्ट्र, ओडिशा और तेलंगाना में लोगों से ऑनलाइन ठगा था। मार्केटिंग चेन की तर्ज पर डिजिटल अरेस्ट गैंग युवाओं को करती है टारगेट आरोपी एक राज्य से दूसरे में बस से भेज रहे बैंक खातों की किट सुमित ठक्कर डिजिटल अरेस्ट करने वाली गैंग ने युवाओं को खाते उपलब्ध करवाने के नाम पर टारगेट कर रखा है। ये मल्टी लेवल मार्केटिंग चेन के सिस्टम की तर्ज पर ऐसे युवाओं को टारगेट करते हैं जिन्हें पढ़ाई के साथ पैसों की जरूरत होती है। इसके लिए गैंग के सरगनाओं ने कई राज्यों में अलग-अलग शहरों में ऐसे एजेंट खड़े कर रखे हैं।
एडिशनल डीसीपी राजेश दंडोतिया ने बताया कि आरोपी इन युवाओं को बैंक खाते किराये पर लेने के लिए मोटा कमीशन का लालच देकर फांसते हैं। युवाओं को समझाते हैं कि वे अपने आईडी से केवल खाते खोल लें। खातों की किट जैसे ही बैंक जनरेट कर इन्हें कोरियर से भेजती है ये छात्रों से वह किट लेकर शहर से बाहरी राज्यों में जाने वाली बसों में रखवा देते हैं। बस में किट रखवाने वाली गैंग के सदस्य इनसे वाट्सएप कॉलिंग और टेलीग्राम के जरिए जुड़े होते हैं। ये जिन बसों पर किट रखवाते हैं उन्हें ये भी नहीं बताया जाता कि ये बैंक खाते की किट किस राज्य में और किसके पास जाएगी। ये हर ऊपर की कड़ी को गोपनीय रखते हैं। सोशल मीडिया पर ऐसे मैसेज भेज फंसाते हैं लालच में खातों के लिए ठगी गैंग द्वारा सोशल मीडिया पर कई तरह के मैसेज भेजकर बैंकों में खाते उपलब्ध करवाने के संदेश भेजे जाते हैं। इनके आधार पर ये अपने टारगेट तलाशते हैं। फिर बैंकों की लंबी सूची देकर छात्र या व्यक्ति जिस भी बैंक में खाता खुलवाने को तैयार होता है उसे अपने नेटवर्क से जोड़ लेते हैं। क्राइम ब्रांच ने इसकी एडवाइजरी भी जारी की है। कॉलेज, यूनिवर्सिटी और कमर्शियल दफ्तर के आसपास ढूंढते हैं छात्रों को खाताधारक- किराए पर खाते लेने के लिए कई शहरों में एजेंट सक्रिय हैं। ये कॉलेज, यूनिवर्सिटी, छात्रों के बैठने के ठिकानों व कमर्शियल दफ्तरों के बाहर घूमते हैं, जहां से ये कमजोर आय वर्ग के छात्रों को खाते खुलवाने के लिए टारगेट कर सकें। झांसे में आने वाले छात्रों को ये तत्काल एजेंट से 5 से 10 हजार रुपए खाते खुलने के पहले ही दे देते हैं। खाते जुटाने वाली टीम- जो युवाओं को टारगेट कर उन्हें बैंक खाते उपलब्ध हो जाने पर हर महीने लाखों का कमीशन बैठे-बैठे मिलने का बोलकर जोड़ते हैं। इनके खातों में ठगी के आरोपी कई खातों से अलग-अलग पैसा ट्रांसफर करते हैं। ट्रांसफर की गई राशि पर 3 से 10 प्रतिशत तक राशि कमीशन के रूप में दे देते हैं। अधिकारी बनकर डराने-धमकाने वाली टीम… ये फोन कॉल कर पुलिस का सेटअप दिखाकर टारगेट किए गए व्यक्ति को कॉल करती है। क्राइम ब्रांच खाते धारक व खाते उपलब्ध करवाने वाली टीम तक पहुंच चुकी है। अब इसके आगे खातों में कमीशन शिफ्ट करने और डराने धमकाने वाली गैंग के सदस्यों तक पहुंचने के लिए कई राज्यों दबिश दे रही है।


