भास्कर न्यूज | गढ़वा गढ़वा सदर अस्पताल परिसर में बने 50 बेड के प्री-मेडिकेटेड वार्ड और एसएनसीयू (स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट) वार्ड में नवजात शिशुओं की सुरक्षा व्यवस्था एक बार फिर सवालों के घेरे में आ गई है। आधुनिक उपकरणों और इलाज की सुविधाओं के बावजूद यहां फायर सेफ्टी के पुख्ता इंतजाम नहीं होने से किसी बड़े हादसे की आशंका से इनकार नहीं किया जा सकता। जानकारी के अनुसार, एसएनसीयू वार्ड में जहां गंभीर रूप से बीमार नवजात बच्चों का इलाज किया जाता है, वहां पूरे वार्ड की सुरक्षा मात्र दो फायर सिलेंडरों के सहारे टिकी हुई है। न तो आटोमैटिक फायर अलार्म सिस्टम है और न ही पानी की स्थायी फायर पाइपलाइन की समुचित व्यवस्था। विशेषज्ञों का मानना है कि नवजात वार्ड जैसे संवेदनशील स्थान पर फायर सेफ्टी में थोड़ी सी भी चूक बच्चों की जान पर भारी पड़ सकती है। पिछले हादसों से भी नहीं लिया गया सबक : झांसी के एक अस्पताल में हुए भीषण अग्निकांड का उदाहरण आज भी लोगों के जेहन में है, जहां फायर सेफ्टी के अभाव में दर्जनों नवजात बच्चों की दर्दनाक मौत हो गई थी। उस अस्पताल में भी फायर सिस्टम नहीं था और फायर सिलेंडर एक्सपायरी डेट के पाए गए थे। इसके बावजूद गढ़वा सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में फायर सेफ्टी को लेकर लापरवाही चिंता बढ़ाने वाली है। सिविल सर्जन डॉ. जॉन एफ. केनेडी ने बताया कि अस्पताल के अधिकांश हिस्सों में फायर सिस्टम लगाया गया है। गढ़वा सदर अस्पताल का प्री मेडिकेटेड अस्पताल। इलाज की सुविधाएं मौजूद, सुरक्षा में कमी सदर अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में नवजात शिशुओं के इलाज के लिए कई आवश्यक सुविधाएं उपलब्ध हैं। यहां 14 वॉर्मर, 8 फोटोथेरेपी यूनिट, 8 पल्स ऑक्सीमीटर मॉनिटर और 4 सिरिंज पंप मौजूद हैं। साथ ही 3 चिकित्सक और 6 नर्सिंग स्टाफ कार्यरत हैं। दवाइयों की अधिकांश व्यवस्था अस्पताल में ही है, कुछ दवाएं मरीजों के परिजनों को बाहर से मंगानी पड़ती हैं। इसके बावजूद फायर सेफ्टी जैसी बुनियादी व्यवस्था का अभाव गंभीर सवाल खड़ा करता है।


