सोनू कुमार|गढ़वा केंद्र और राज्य सरकार अस्पताल में बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध करने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर रही है। लेकिन सरकार के मंसूबों पर जिले के अधिकारी पानी फेर रहे है। स्वास्थ्य विभाग में पिछले एक महीने में लाखों रुपए की सामग्री की खरीदारी किया गया है। उसमें आधे से अधिक इन दिनों कचड़े में पड़े हुए है। मार्च क्लोजिंग से पहले राशि को खपत करने के लिए लाखों रुपए की लागत से स्ट्रेचर व्हील चेयर, बेंच डेस्क कुर्सी ऑक्सीजन प्लांट, रुम हीटर, बेड की खरीदारी की गई। लेकिन उसमें आधे से अधिक सामान इन दिनों सदर अस्पताल के कचरे खाना में पड़े हुए है। लोगों का कहना है कि स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी कमीशन के चक्कर में बिना जरूरत की सामान की भी खरीदारी कर रहे है। ओर वह कचरे में रखे रखे खराब हो रहे है। सदर अस्पताल में लाखों रुपए के लागत से एक्सरे मशीन की खरीदारी कर उसे लगाया गया। लेकिन वह भी इन दिनों धूल फांक रही हैं। करोना महामारी के दौरान जिले में लगभग करोड़ लाख रुपए की लागत से कई जीवन रक्षक यंत्र लगाए गए। जिसमें दो ऑक्सीजन प्लांट, बेडवार ऑक्सीजन की सप्लाई, चलत यूक्त वेंटिलेटर, आइसीयू वार्ड, एनआईसीयू वार्ड बनाए गए। जिसमें लगभग 80 से 90 लाख रुपए खर्च हुए। लेकिन इन दिनों सभी करोड़ रुपए की सामान खराब स्थित में है। तो कुछ बदहाल स्थिति में है तो कुछ गायब हो गए। अब स्वास्थ्य विभाग के पदाधिकारी एक बार पुनः महामारी से निपटने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर करोना के स्पेशल वार्ड तैयार कर रही है। जिसमें प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन की सप्लाई भी शामिल है। बताते चले कि 2023 में 3.5 करोड़ों रुपए की लागत से अस्पताल का मरम्मत की गई। नए व पुराने अस्पताल में प्रत्येक बेड पर ऑक्सीजन सप्लाई के लिए लगभग 10 लाख रुपए खर्च किए गए थे। लेकिन उसका लाभ जिले के मरीजों को एक माह भी नहीं मिला। लेकिन अब वह इन दिनों जर्जर स्थिति में पड़ा हुआ है।


