गुड़ाबांदा में फिर उग्रवाद की आहट लेवी वसूली से व्यवसायी दहशत में

राजेश सिंह | घाटशिला/ गुड़ाबांदा कभी नक्सलियों का गढ़ कहलाने वाला गुड़ाबांदा एक बार फिर उग्रवादी गतिविधियों की चपेट में आने की आशंका से घिर गया है। हाल ही में पीएफएफआई उग्रवादी संगठन के नाम पर लेवी वसूली की घटनाएं सामने आई हैं, जिससे पुलिस महकमा सतर्क और आम लोग दहशत में हैं। मुड़ाठाकरा के दो व्यापारियों रसानंद पातर तथा एक अन्य होटल व्यवसायी से लेवी वसूली की खबरों के बाद पुलिस जांच में जुटी है, लेकिन अब तक यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि यह घटना वास्तव में उग्रवादी संगठन की करतूत है या फिर कुछ शरारती तत्व इसके नाम पर भय का माहौल बना रहे हैं। गुड़ाबांदा, जो कभी उग्रवाद के साए में था, अब एक बार फिर दहशत में है। प्रशासन और पुलिस को जल्द से जल्द इस मामले की सच्चाई सामने लाकर दोषियों पर कार्रवाई करनी होगी, वरना यह इलाका एक बार फिर हिंसा और भय की चपेट में आ सकता है। गुड़ाबांदा को एक समय नक्सलियों का सुरक्षित ठिकाना माना जाता था। बंगाल से आए नक्सली दस्तों ने इस इलाके में अपने संगठन का विस्तार किया और बेरोजगार युवाओं को जोड़कर पुलिस प्रशासन के लिए सिरदर्द बने रहे। इस बढ़ते प्रभाव को रोकने के लिए स्थानीय नागरिक सुरक्षा समिति का गठन किया गया, जिससे नक्सलियों और सुरक्षा बलों के बीच लंबे समय तक संघर्ष चला। इस दौरान कई निर्दोष लोगों की हत्या हुई और उग्रवादी हिंसा का दायरा बढ़ता गया। नक्सलियों के दु:स्साहस की पराकाष्ठा तब देखने को मिली जब उन्होंने धालभूमगढ़ के तत्कालीन बीडीओ प्रशांत लायक का अपहरण कर उन्हें गुड़ाबांदा के जंगलों में ले गए। इस घटना के बाद सरकार और पुलिस प्रशासन सक्ते में आ गए थे। सरकार को झुकना पड़ा था और नक्सलियों के रिहाई के एवज में बीडीओ को मुक्त किया गया था। 2017 में बड़े पैमाने पर नक्सलियों ने किया था आत्मसमर्पण लगातार पुलिस दबिश और सुरक्षा बलों की कार्रवाईयों के कारण नक्सली संगठन कमजोर पड़ने लगे। 15 फरवरी 2017 को कान्हू मुंडा के नेतृत्व में एक बड़ा नक्सली दल आत्मसमर्पण कर दिया, जिससे गुड़ाबांदा और आसपास के इलाकों में नक्सलवाद लगभग समाप्त हो गया था। फिर लौट रहा है नक्सलवाद पिछले कुछ वर्षों की शांति के बाद अब फिर से उग्रवाद के नाम पर लेवी वसूली की घटनाएं सामने आ रही हैं। हालांकि, यह स्पष्ट नहीं हो पाया है कि वास्तव में उग्रवादी संगठन ही इस घटना को अंजाम दे रहे हैं या फिर कुछ असामाजिक तत्व इसका फायदा उठाकर भय फैलाने की कोशिश कर रहे हैं। पुलिस प्रशासन इस पूरे मामले की गंभीरता से जांच कर रहा है। व्यापारियों और स्थानीय लोगों में भय का माहौल बना हुआ है। नक्सली आकाश की तलाश जारी झारखंड पुलिस 72 ऐसे नक्सलियों की तलाश है जिन पर सरकार ने इनाम घोषित कर रखा है। इनमें एक करोड़ से लेकर 15 लाख, 10 लाख, पांच लाख, दो लाख और एक लाख के इनामी नक्सली शामिल हैं। सांसद सुनील महतो की हत्या समेत जिले में नक्सली हिंसा के मास्टर माइंड रहे असीम मंडल उर्फ आकाश उर्फ तिमिर पर एक करोड़ पटमदा के झुझका निवासी राम प्रसाद मार्डी, पश्चिम बंगाल के पश्चिम मिदनापुर के सालबनी निवासी मदन महतो पर 15-15 लाख, पश्चिम बंगाल के बेलपहाड़ी ग्राम बिदरी निवासी पुष्पा महतो उर्फ शंकुतला उर्फ पेरी पर पांच लाख और रामप्रसाद मार्डी की पत्नी मीता उर्फ नयनतारा उर्फ झुम्पा पर एक लाख रुपये का इनाम है।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *