चुनाव में मिली हार से सबक नहीं ले रही भाजपा: सुप्रियो

प्रदेश भाजपा अध्यक्ष बाबूलाल मरांडी ने डीजीपी नियुक्ति मामले में राज्य सरकार पर निशाना साधा। कहा- झारखंड की जनता को धोखे में रखकर हेमंत सरकार ने सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का उल्लंघन किया है। न सिर्फ संविधान की मर्यादाओं को तोड़ा है, बल्कि राज्य की पुलिस व्यवस्था को अपनी राजनीतिक साजिशों का हथियार बनाया है। मरांडी बुधवार को प्रदेश भाजपा कार्यालय में प्रेसवार्ता में बोल रहे थे। उन्होंने कहा-सुप्रीम कोर्ट ने वर्ष 2006 में निर्देश दिया था कि डीजीपी की नियुक्ति यूपीएससी के अनुशंसित पैनल से होगी, पर हेमंत सरकार ने इसे दरकिनार कर अपनी मर्जी से अनुराग गुप्ता को डीजीपी बना दिया। जबकि, गुप्ता का नाम यूपीएससी की अनुशंसित सूची में नहीं था। गुप्ता को चुनाव कार्य से भी मुक्त रखा गया था, जो अफसर गलत कार्यों से वर्षों तक निलंबित रहा। जिसकी नौकरी की वास्तविक उम्र सीमा 30 अप्रैल को खत्म हो रही है। ऐसे में उसे डीजीपी बनाने की जरूरत क्यों पड़ी? भाजपा पहले विधायक दल का नेता चुन ले भट्टाचार्य ने कहा- पहले तीन नाम भेजे जाते थे, जिनमें से एक का चयन होता था, पर अब इस प्रक्रिया को समाप्त कर दिया गया है। उन्होंने मरांडी पर कटाक्ष करते हुए कहा कि झारखंड की जनता ने उन्हें विपक्ष में बैठा दिया है। इसलिए, भाजपा को उसी भूमिका में रहना चाहिए। भट्टाचार्य ने कहा कि आज भाजपा और उसके नेता सुप्रीम कोर्ट के आदेशों का हवाला देते नहीं थक रहे हैं, लेकिन सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में यह भी कहा है कि भाजपा अपने विधायक दल का नेता और विधानसभा में नेता प्रतिपक्ष तय करे। वे अपनी पार्टी में एक नेता तक तय नहीं कर पा रहे हैं। सुप्रियो ने सवाल खड़ा करते हुए कहा कि झारखंड भाजपा में क्या बाबूलाल मरांडी, चंपाई सोरेन और सीपी सिंह में से कोई योग्य नहीं हैं? आखिर बीजेपी को ऐसी कौन सी मजबूरी है कि वह अपना राष्ट्रीय अध्यक्ष तक तय नहीं कर पा रही है। पूर्व न्यायाधीश ने की गुप्ता की पैरवी मरांडी ने कहा- सवाल उठता है कि राज्य सरकार ने 2025 की नियमावली को भूतलक्षी प्रभाव से लागू करने की कोशिश क्यों और कैसे की? और राज्य सरकार के अधिकारियों ने इस अवैध प्रक्रिया को कैसे अनुमति दी? कहा- डीजीपी की अवैध नियुक्ति प्रक्रिया में झारखंड हाईकोर्ट के एक पूर्व न्यायाधीश शामिल बताए जा रहे है‌ं। अगर, पूर्व न्यायाधीश खुद राज्य सरकार के अवैध कार्यों में शामिल हो जाएंगे, तो न्यायपालिका की निष्पक्षता पर असर पड़ेगा? उन्होंने मांग की कि डीजीपी की अवैध नियुक्ति को रद्द किया जाए। झारखंड हाइकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश स्वतः संज्ञान लेकर इस मामले की सुनवाई करें। सुप्रीम कोर्ट इस अवमानना मामले में राज्य सरकार के खिलाफ कड़ी कार्रवाई करे। अनुराग गुप्ता के कार्यकाल की सीबीआई जांच हो। अवैध नियुक्ति प्रक्रिया में शामिल हाइकोर्ट के पूर्व न्यायाधीश को किसी सरकारी पद पर नियुक्त नहीं किया जाए। भाजपा शासित राज्य भी ऐसे ही चुनते हैं डीजीपी सुप्रियो बोले-जिस प्रक्रिया पर मरांडी सवाल उठा रहे हैं, उसी पर भाजपा शासित राज्य भी डीजीपी चनते हैं। दक्षिण के राज्यों में भी यही परंपरा है। फिर वे किस मुंह से झारखंड सरकार के फैसले पर सवाल उठा रहे हैं। क्या चुनाव में धांधली का पुरस्कार दिया गया? मरांडी ने सवाल किया- क्या अनुराग गुप्ता को चुनाव में धांधली का पुरस्कार दिया गया? इस सरकार ने 2025 में एक नियमावली बनाई, जबकि अधिनियम पारित नहीं हुआ। तो यह रूल कैसे बन गया? सबसे विवादित अफसर को बना दिया डीजीपी: बाबूलाल डीजीपी नियुक्ति पर विपक्ष और सत्ता पक्ष और विपक्ष का आरोप प्रत्यारोप जारी है। बुधवार को झामुमो ने भाजपा पर पलटवार किया है। झामुमो के केंद्रीय महासचिव सुप्रियो भट्टाचार्य ने कहा है कि भाजपा को विपक्ष में बैठने का जनादेश मिला है। फिर भी आधारहीन बातों को आधार बना कर सरकार के कामों का विरोध कर रही है। मालूम हो कि रेगुलर डीजीपी नियुक्त करने पर भाजपा ने पूरी नियुक्ति प्रक्रिया पर सवाल उठाए था। बुधवार को सुप्रिया भट्टाचार्य ने पार्टी कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में कहा कि बाबूलाल मरांडी यह सोच रहे थे कि वे राज्य के मुख्यमंत्री बनेंगे, लेकिन जब यह सपना टूट गया, तो वे अब सरकार के हर निर्णय पर सवाल उठा रहे हैं। कहा कि बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री थे, और उनके कार्यकाल में भी कई महत्वपूर्ण निर्णय लिए गए थे। झामुमो नेता ने कहा कि कई राज्यों में सरकारें अपने तरीके से डीजीपी का चयन करती हैं।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *