रांची | सदर अस्पताल अब भव्य हो गया है। कई सुपरस्पेशियालिटी विभाग खुल गए हैं। फिर भी अव्यवस्था ने सिस्टम बिगाड़ कर रख दिया है। स्ट्रेचर हैं, ट्रॉली मैन भी हैं। लेकिन जरूरत के समय मरीज या घायलों के लिए उपलब्ध नहीं होते। स्ट्रेचर का उपयोग सामान ढोने के लिए किया जा रहा है। वहीं ट्रॉली मैन कहीं बैठकर मोबाइल पर व्यस्त नजर आते हैं या एक जगह बैठकर गप्पे लड़ाते हैं। इसका खामियाजा मरीज और उनके परिजनों को उठाना पड़ता है। उन्हें खुद मरीज को उठाकर या टांगकर ले जाना पड़ता है। स्ट्रेचर है, पर मरीज के लिए नहीं ट्रॉली मैन हैं.. पर मां के कंधे पर मरीज घायल हुए या बीमार तो इसी तरह पहुंचेंगे बेड तक महिला के पैर में पट्टी बंधी है। उनको सहारा देकर ले गए परिजन। जबकि ट्रॉली मैन बैठकर गप्पें मार रहे थे। ट्रॉली नहीं मिली तो बच्चे के पैर का प्लास्टर होने के बाद मां ऐसे गोद में उठा कर बाइक तक ले गईं। सदर अस्पताल में ट्रॉली पर ढोया जा रहा सामान। सभी फोटो | माणिक बोस


