टीआरआई मोरहाबादी में 3 दिवसीय जेंडर और क्लाइमेट चेंज पर चित्रकला कार्यशाला का आगाज मंगलवार को हुआ। असर और देशज अभिक्रम के संयुक्त प्रयास से आयोजित इस कार्यशाला में झारखंड की 19 युवा महिला कलाकार शामिल हुईं। इनमें अधिकतर आदिवासी समुदाय से आती हैं। 3 दिनों तक सभी प्रतिभागी रचनात्मक रूप से चित्रित करेंगी कि जलवायु परिवर्तन किस प्रकार से महिलाओं और लड़कियों को प्रभावित करता है। उद्घाटन पहले दिन राज्यसभा सांसद महुआ माजी ने किया। उन्होंने जलवायु और पर्यावरण से जुड़े संवादों में विशेष रूप से आदिवासी समुदाय की महिलाओं की भागीदारी को महत्वपूर्ण बताया। सामाजिक कार्यकर्ता श्रावणी ने विषय प्रवेश कराते हुए कहा कि जेंडर केवल जैविक भेद नहीं, बल्कि समता और न्याय की पुकार है। पर्यावरणविद् नीतीश प्रियदर्शी ने कहा कि पिछले एक दशक में झारखंड ने जलवायु परिवर्तन के तीव्र प्रभावों का सामना किया है। ये आदिवासी क्षेत्रों की महिलाओं को असमान रूप से प्रभावित करती हैं। अनुभवों को चित्रकला, स्केचिंग के माध्यम से करेंगी व्यक्त देशज अभिक्रम के संस्थापक शेखर ने कहा कि हम एक ऐसा मंच बनाना चाहते थे, जहां राज्य की महिला कलाकार अपने अनुभवों को चित्रकला, स्केचिंग और अन्य कला विधाओं के माध्यम से व्यक्त कर सकें। असर की नेहा सैगल ने कहा कि यह कार्यशाला जलवायु परिवर्तन को लोगों के जीवन के अनुभवों से जोड़ने में मदद करेगी। इन महिला पेंटर ने बनाईं पेंटिंग : रोशनी खलखो, मनीता उरांव, सुधा, ज्योति, शुशमी, निशि, अनुकृति, दिव्यश्री, रितेषणा, रंजिता, सृजिता, पिंकी, मानसी, काराबी, चांदनी, तान्या, सोफिया, नीलम व अर्पिता।


