भास्कर न्यूज| लुधियाना। बच्चों को अनुशासित करने और उनकी सफलता सुनिश्चित करने की चाहत में कई माता-पिता टाइगर पेरेंटिंग का तरीका अपनाते हैं। इसमें माता-पिता बच्चों से बहुत ऊंची उम्मीदें रखते हैं, उनके हर कदम पर नजर रखते हैं और कई बार उनकी इच्छाओं को दरकिनार कर देते हैं। हालांकि, यह तरीका कुछ बच्चों को अनुशासित और सफल बना सकता है, लेकिन कई मामलों में इसका नकारात्मक असर भी देखने को मिलता है। अधिक दबाव के कारण बच्चों में तनाव, आत्मविश्वास की कमी और निर्णय लेने की स्वतंत्रता पर असर पड़ सकता है। एक्सपर्ट बता रहे हैं तीन ऐसे मामले, जहां टाइगर पेरेंटिंग का बच्चों पर अलग-अलग प्रभाव पड़ा।एक लड़की के माता-पिता भी सख्त थे, लेकिन वे उसकी रुचि को भी महत्व देते थे। उन्होंने उसे पढ़ाई में अनुशासन सिखाया, लेकिन साथ ही खेल-कूद और अन्य गतिविधियों के लिए भी समय दिया। इससे उसने एक बैलेंस्ड लाइफ जी और अपनी पढ़ाई में भी अच्छा किया। वह आज एक सफल इंजीनियर है और अपने माता-पिता के फैसलों की सराहना करती है, लेकिन कहती है अगर माता-पिता टाइगर पेरेंटिंग अपनाते हैं, तो उन्हें बच्चों की मानसिक स्थिति को भी समझना चाहिए। अनुशासन जरूरी है, लेकिन खुशी और संतुलन भी उतना ही अहम है।


