लुधियाना | युद्ध के हालात में लोगों को कैसे सुरक्षित रखना है, इस उद्देश्य से बुधवार को लुधियाना के कुछ हिस्सों में ब्लैक आउट रहा। प्रशासन ने रात 8 बजे से 8:30 तक बिजली काट दी। लेकिन, कुछ लोगों ने इन्वर्टर से पूरे घर में बिजली चालू रखी। हालांकि, ऐसे लोग बहुत कम थे, लेकिन अगर ये युद्ध के हालात होते तो ये लोग पूरे शहर के लिए बड़ा खतरा हो सकते थे। इन चंद लोगों ने लाखों लोगों के प्रयासों को विफल कर दिया। दूसरी ओर, पाकिस्तान में आतंकी ठिकानों पर किए गए मिसाइल अटैक के बाद लोगों में दहशत भी नजर आई। सुबह से ही किराना स्टोर्स पर भीड़ नजर आई। लोगों ने राशन को स्टॉक किया। हालांकि, ऐसे लोग भी कम ही थे। शाम 7 बजे के बाद कुछ बजारों में दुकानें बंद कर दी गईं। दुकानदारों का तर्क था कि ब्लैक आउट के दौरान लूट की घटनाएं हो सकती हैं, इसलिए उन्होंने दुकानें बंद करने का फैसला किया। जिला प्रशासन ने लोगों से अपील की है कि देशहित में सोशल मीडिया की अफवाहों से दूर रहना जरूरी है। एनडीआरएफ की बस सीधे वेरका प्लांट पहुंची। डमी घायलों को तत्काल एंबुलेंस तक पहुंचाया गया। डॉग स्क्वॉड की मदद से जांच की। तत्काल ही मेडिकल टेंट हाउस तैयार किया। एनडीआरअएफ की टीम ने मौके पर ही ड्रेस चेंज की और राहत कार्य भी जारी रखा। एनसीसी कैडेट्स ने घायलों की मदद की और उन्हें एंबुलेंस तक पहुंचाया। भास्कर एक्सपर्ट भारत-पाक में बढ़े तनाव को देखते हुए जिला प्रशासन ने बुधवार शाम 4 बजे मॉक ड्रिल की। सबकुछ पहले से तय था कि आपात स्थिति में किसे क्या जिम्मेदारी निभानी है। बावजूद इसके कई खामियां नजर आईं। मॉक ड्रिल के लिए वेरका प्लांट के पास टायर जलाकर इमरजेंसी के हालात क्रिएट किए गए। यहां वॉलंटियर पहले से जुट गए थे। शाम 4 बजे सायरन बजाया गया। सबसे पहले दोपहर 3:59 बजे एडिशनल कमिश्नर परमदीप सिंह खैहरा, सहायक आयुक्त उपिंदरजीत कौर बराड़ समेत चिकित्सकों की टीम पहुंची। लेकिन, आपदा के दौरान बरती जाने वाली सावधानी को लेकर अफसर ही अनजान थे। उन्होंने मास्क तक नहीं पहने थे। डीसी हिमांशु जैन 4 बजे पहुंच गए थे, लेकिन कुछ देर बाद ही निकल गए। निगम कमिश्नर आदित्य डेचलवाल पहुंचे ही नहीं। हालांकि, सेना के अफसर यहां एनसीसी कैडेट्स को जागरूक करते नजर आए। अग्निशमन विभाग और एनडीआरएफ ने आपदा प्रबंधन तकनीकों पर प्रदर्शन किया। स्लीपर सेल की सूचना तत्काल प्रशासन-पुलिस को दें ऑपरेशन सिंदूर में भारतीय सेना की साहसिक कार्रवाई के बाद पाकिस्तान अब बौखलाया है। पाकिस्तान अब अपने स्लीपर सेल को एक्टिव करके आम लोगों के बीच भेजेगा। इसलिए आम लोग जागरूक रहें। आसपास कोई भी संदिग्ध दिखे, उसकी सूचना प्रशासन अथवा पुलिस को दें। फोन पर किसी तरह की संदिग्ध बातचीत न करें और न ही सेना या पुलिस से जुड़ी कोई वीडियो व फोटो सोशल मीडिया पर शेयर करें। 7 मिनट में गाड़ियां पहुंचनी चाहिए थीं, जो नहीं हो पाया {वेरका प्लांट में 4 बजे सायरन बजा। फायर ब्रिगेड की गाड़ी 4.25 बजे पहुंची, जोकि 4:07 बजे पहुंचनी चाहिए थी। {वेरका परिसर में 3 एंबुलेंस 4:17 बजे पहुंचीं। चालक को एंबुलेंस खड़ी करने की जगह का पता नहीं था। एक व्यक्ति ने ड्राइवर को इशारा कर पार्किंग स्थल बताया। फिर एंबुलेंस डमी घायल को लेकर शाम 4:35 बजे रवाना हुई। यानी, घटना के 35 मिनट बाद। {सिविल डिफेंस से जुड़े जिले में 1200 लोग हैं, जिसमें से 300 भी मौके पर नहीं पहुंच पाए। जो पहुंचे, उनके पास भी मास्क नहीं थे। सिविल डिफेंस से जुड़े लोगों ने संसाधन नहीं होने की बात स्वीकार की। मॉक ड्रिल के दौरान दिखीं खामियां, संसाधन भी पूरे नहीं ब्लैक आउट में ये रोशनी राष्ट्रहित में सही नहीं प्रशासन ने बिजली बंद की, पर कुछ लोगों ने इन्वर्टर से घर रोशन कर दिए कर्नल एसडी गोस्वामी, (रिटा.)


