सब-कमेटियां बनने से प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी- अवैध बिल्डिंग बनाने पर रोक लगाने, लोगों की शिकायतों के निपटारे में आएगी तेजी

भास्कर न्यूज | अमृतसर निगम हाउस की मीटिंग के 31 दिन के बाद 1 मई को 6 मेंबरी फाइनांस एंड कांट्रेक्ट कमेटी (एफएंडसीसी) का गठन करने के लिए ईस्ट हलका से ही 2 पार्षदों को शामिल करने पर मेयर घिरे थे। 29 मार्च को निगम हाउस मीटिंग के 50 दिन बाद भी सब-कमेटियों का गठन नहीं किया जा सका है। बता दें कि यह कमेटी प्रॉपर्टी टैक्स, एमटीपी, हेल्थ, ओएंडएम व अन्य विभागों पर पार्षदों को चेयमैन-उप चेयरमैन लगाकर बनाई जाती है, ताकि निगम में चल रहे कामों में तेजी लाई जा सके। साथ ही अफसरों की मनमानी पर नकेल कसी जा सके। सब कमेटी का गठन होने के बाद अफसरों का टाइम भी बचता है। चूंकि चेयरमैन अपने लेवल पर मीटिंग बुलाकर केसों का निपटारा करा सकते हैं। मीटिंग में लिए गए फैसलों को उच्च अफसरों के पास भेजकर लागू कराने के लिए लिखते हैं। प्रॉपर्टी टैक्स रिकवरी में तेजी-अवैध बिल्डिंग बनाने पर रोक लगाने, लोगों की शिकायतों के निपटारे में तेजी, दफ्तरों में मुलाजिमों के समय से पहुंचने जैसे सुधार होंगे। कुछ मिलाकर यह कहें कि लोकल बॉडीज का जो एक ढांचा सरकार की तरफ से तैयार किया गया है, उसमें सब कमेटी का अपना अहम रोल होता है। मगर लंबे समय तक अलग-अलग विभागों का चेयरमैन नहीं लगाया जाना इस ओर इशारा कर रहा है कि अब तक पार्टी में अंदरखाते सबकुछ ठीक नहीं चल रहा है। बता दें कि एफएंडसीसी कमेटी बनने के बाद डिप्टी मेयर अनीता, लेकर सीनियर डिप्टी मेयर प्रियंका शर्मा ने खुलकर विरोध जताया था कि ईस्ट हलका से ही 2 पार्षदों को शामिल करना किसी को ऑब्लाइज करने जैसा है। जबकि इस कमेटी के बाद मेयर दफ्तर में पार्षदों का जमावड़ा लगना भी शुरू हो गया था, ताकि सब-कमेटी में जगह मिल जाए। पार्षदों ने एफएंडसीसी में ईस्ट हलके के ही दो पार्षदों को शामिल करने पर मेयर को घेरा था। वहीं, हर माह निगम हाउस की मीटिंग बुलाने का नियम है मगर 50 दिन बीतने के बाद भी शहर के डवलपमेंट व अन्य मुद्दों पर चर्चा के लिए दूसरी मीटिंग नहीं बुलाई जा सकी है। सारे विकास काम कागजों और बयानों में दौड़ रहे हैं। बायोरेमिडेशन से लेकर ट्रांसपोर्टेशन की टेंडर प्रक्रिया वर्कऑर्डर होने के बाद ही राहत मिलने की उम्मीद है। अगले हफ्ते सब-कमेटियों का गठन कर दिया जाएगा। डवलपमेंट कामों से किसी तरह का समझौता नहीं किया जा रहा है। निगम के अंदर जो भी गड़बड़ियां सामने आ रहीं उन पर नजर रख रहे हैं। डियरनेस अलाउंस (डीए) को लेकर जो मामला सामने आया है, उस बारे संबंधित विभाग के हैड से रिपोर्ट तलब की जाएगी। – जतिंदर मोती भाटिया, मेयर सब-कमेटी का चेयरमैन निगम से जुड़े कोई भी काम हों उन पर निगरानी रखता है। यदि कोई गड़बड़ी हो रही तो उसकी रिपोर्ट तैयार करके मेयर-निगम कमिश्नर अथवा अन्य उच्च अफसरों के अलावा सरकार को भी भेज सकता है। कोई भी डवलपमेंट काम कराया जा रहा तो संबंधित ब्रांच के हैड को फाइल चेयरमैन के पास भेजनी होती है। उदाहरण के तौर पर प्रॉपर्टी टैक्स से जुड़ा कोई केस है तो चेयरमैन उसकी सुनवाई करेगा। साथ ही निपटारा भी कराएगा। अफसर इस कमेटी के मेंबर होंगे।

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