सभी कार्यों के पीछे ईश्वर ही सच्चे कर्ता हैं

श्री जैन श्वेताम्बर साधु मार्गी जैन संघ के आचार्य 1008 श्री रामलाल की आज्ञानुवर्ती शासन दीपिका समियाश्री आदि ठाणा रांची में 10 दिवसीय प्रवास के बाद रविवार को जैन साध्वियों कामनाश्री, सुधृतिश्री और इहिताश्री के साथ छत्तीसगढ़ के मंगल विहार के लिए रवाना हो गई। श्री जैन श्वेतांबर संघ के पदाधिकारियों और प्रमुख सदस्यों ने उन्हें विदाई दी। रविवार की रात उनका रात्रि विश्राम पुंदाग में हुआ और सोमवार को सुबह नगडी के लिए रवाना होगी। रांची ओसवाल संघ के अध्यक्ष सुभाष बोथरा, उपाध्यक्ष घेवरचंद नाहटा, मूल चंद सुराणा, बलबीर जैन और 100 से अधिक श्रावक श्राविकाओं ने विदा किया। श्वेतांबर जैन समाज को आशीर्वाद देते हुए शासन दीपिका समियाश्री ने कहा कि हमारा जीवन अमूल्य है। इसकी कोई कीमत नहीं लगाई जा सकती। हम भौतिक सुख पाने के चक्कर में हैं और असली धन मानव जीवन को खो रहे हैं। हमारे इस जन्म में किए गए कर्मों के आधार पर आगे जन्मों की गति निर्भर करेगी। श्री श्वेतांबर जैन रांची संघ के अध्यक्ष अशोक सुराणा और मंत्री उत्तम चोरड़िया ने बताया कि प्रवास के दौरान लगातार नौ दिनों तक अपने प्रवचन के माध्यम से समाज के लोगों को जीवन में संयम बरतने का संदेश दिया। हिंसा से दूर रहने और धर्म से जुड़ने का आह्वान किया। मौके पर श्वेतांबर संघ से बिमल दस्साणी, भास्कर पींचा, सुमित बेंगाणी, अशोक सुराणा, जय जैन व अन्य थे। संजय पाटनी निर्विरोध चुने गए दिगंबर जैन महासभा के संयुक्त महामंत्री रांची | भारत की सबसे बड़ी जैन समाज की संस्था भारतवर्षीय दिगंबर जैन महासभा के चुनाव में रांची के संजय जैन पाटनी निर्विरोध राष्ट्रीय महासचिव चुने गए।भगवान महावीर तिर्थंकर यूनिवर्सिटी मुरादाबाद में हुए चुनाव में उनके खिलाफ किसी भी उम्मीदवार ने नामांकन नहीं किया। संजय जैन पाटनी राजनीतिक चेतना मंच के झारखंड प्रदेश मंत्री संजय पाटनी ने महासभा के चुनाव में निर्विरोध राष्ट्रीय संयुक्त मंत्री चुने गए। उनके चयन पर केंद्रीय रक्षा राज्यमंत्री संजय सेठ, विधायक सीपी सिंह, नवीन जायसवाल समेत अन्य लोगों ने बधाई दी। भौतिक सुख पाने के लिए असली धन मानव जीवन को खो रहे हैं : समियाश्री गीता केवल दार्शनिक नहीं है, बल्कि इसमें दैनिक जीवन में लागू होने वाली योग की स्पष्ट तकनीकें भी शामिल हैं। यह हमारे जीवन पर निष्काम कर्म, भक्ति और आत्म-नियंत्रण पर प्रकाश डालती है। कर्मयोग का पालन करना, बिना फल की इच्छा किए अपने धर्म और कर्तव्य का पालन करना इसका प्रमुख संदेश है। ये बातें योगदा के सन्यासी स्वामी ईश्वरानंद गिरि ने कही। योगदा सत्संग सोसाइटी ऑफ इंडिया रांची आश्रम में रविवार को आयोजित एक विशेष आध्यात्मिक कार्यक्रम के साथ गीता जयंती मनाई गई। गीता जयंती भारत और विश्वभर में लाखों लोगों द्वारा सोमवार को मनाई जाएगी। इस दिन भगवान श्री कृष्ण ने कुरुक्षेत्र के मैदान में अर्जुन को भगवद्गीता के अमर उपदेश दिया था। योगदा के सन्यासी स्वामी ईश्वरानंद गिरि द्वारा हिंदी में निष्काम कर्म आत्मा की मुक्ति का मार्ग शीर्षक से सीधा प्रसारण ऑनलाइन प्रवचन किया गया। परमहंस योगानंद की ईश्वर-अर्जुन संवाद श्रीमद्भगवद्गीता में दिए व्याख्या से लेते हुए स्वामी ईश्वरानंद ने अध्याय 2 के श्लोक 47 से 51 तक की व्याख्या की। स्वामी योगानंद के विचारों को स्पष्ट करते हुए स्वामी ईश्वरानंद ने इस बात पर जोर दिया कि योगी ऊर्जावान, निःस्वार्थ भाव से और आंतरिक संतुलन के साथ कार्य करना सीखता है और यह पहचानते हुए कि सभी कार्यों के पीछे ईश्वर ही सच्चे कर्ता हैं। उन्होंने योगानंद द्वारा योग की परिभाषा उचित कर्म करने की कला के रूप में बताई और यह स्पष्ट किया कि कैसे सही दृष्टिकोण, भक्ति व आंतरिक समर्पण कर्म को आध्यात्मिक मुक्ति के मार्ग में परिवर्तित कर देते हैं। सैकड़ों लोगों ने व्यक्तिगत रूप से कार्यक्रम में भाग लिया। योगदा सत्संग आश्रम रांची में गीता जयंती मनाई गई, स्वामी ईश्वरानंद बोले-

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