सभी निकायों में 10 एकड़ जमीन पर बनाया जाएगा बायो सीएनजी प्लांट

भास्कर न्यूज | जांजगीर सभी नगरीय निकायों में बायो-सीएनजी प्लांट लगाए जाएंगे। कैबिनेट से अप्रुवल के बाद प्लांट शुरू करने एक रुपए वर्गमीटर में 10 एकड़ जमीन 25 साल की लीज पर दी जाएगी। 7 मई को नगरीय प्रशासन विभाग ने सभी जिला कलेक्टरों को चिट्ठी भेजी है। दरअसल 17 अप्रैल को हुई कैबिनेट की बैठक में निर्णय लिया था कि प्रदेश के सभी नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट और खेतों से निकलने वाले अपशिष्ट के प्रसंस्करण के लिए बायो सीएनजी प्लांट स्थापित किए जाएंगे। इसके लिए रियायती लीज दर पर सरकारी जमीन दी जाएगी। इसके लिए सभी नगर निगमों को अधिकृत किया था। भारत में उपयोग होने वाले सीएनजी का लगभग 46 फीसदी वर्तमान में आयात किया जाता है और सरकार का लक्ष्य बायो-सीएनजी के उत्पादन और खपत के माध्यम से इस निर्भरता को कम करना है। पहले चरण में जिले के नगरीय निकायों में जमीन का चिह्नांकन होगा। फिर निर्माण शुरू कराने टेंडर प्रक्रिया होगी। राज्य के नगरीय निकायों में जैव अपशिष्ट सह कृषि अपशिष्ट के प्रसंस्करण स्थापित करने सार्वजनिक क्षेत्र के उपक्रमों एवं शासकीय तेल और गैस विपणन कंपनियों को बायो-सीएनजी संयंत्रों बनाने अधिकतम 10 एकड़ शासकीय भूमि का आबंटन रियायती लीज दर 1 रुपए प्रति वर्गमीटर, अधिकतम 25 वर्षों के लिए लीज पर देंगे। बायो सीएनजी, जिसे बायो कंप्रेस्ड नेचुरल गैस भी कहते हैं। इसका उपयोग वाहनों के ईंधन और घरेलू ऊर्जा के रूप में होता है। सीएनजी वाहनों को ईंधन देने, एलपीजी के विकल्प के रूप में खाना पकाने और हीटिंग के लिए, बिजली उत्पादन के लिए आदि में उपयोग कर सकते हैं। क्या है बायोसीएनजी? बायो सीएनजी का उत्पादन जैविक अपशिष्ट पदार्थों जैसे पशु अपशिष्ट, खाद्य अपशिष्ट और औद्योगिक कीचड़ को बायोगैस और डाइजेस्टेट में तोड़कर किया जाता है। यह प्रक्रिया एक सीलबंद, ऑक्सीजन रहित टैंक में होती है, जिसे एनारोबिक डाइजेस्टर भी कहा जाता है। फिर बायोगैस को संसाधित किया जाता है, जिससे 95 फीसदी शुद्ध मीथेन गैस प्राप्त होती है। इस प्रक्रिया से उच्च गुणवत्ता वाला सांद्रित तरल उर्वरक प्राप्त होता है। वाहनों के ईंधन, घरेलू ऊर्जा में होगा उपयोग 2050 तक तीन गुना होगी तेल-गैस की खपत यह ऊर्जा उत्पादन के लिए जैविक अपशिष्ट का उपयोग करके लैंडफिल में डाले जाने वाले ठोस अपशिष्ट से जुड़ी समस्याओं से बचने में मदद कर सकता है। देश में 2050 तक तेल और गैस की खपत तीन गुना होने की उम्मीद है। बायो-सीएनजी की मांग को पूरा करने के लिए अक्षय ऊर्जा स्रोत के रूप में बढ़ावा दिया जा रहा है। गांव मंे तनाव का माहौल शाम तक गांव में भारी तनाव का माहौल बना रहा और युवक की मौत के बाद स्थिति और गंभीर हो गई। 13 मई को सरपंच द्वारा समझौते की बैठक बुलाई थी, जिसमें धर्मेश और उसके पिता को बुलाया गया, लेकिन वे नहीं पहुंचे। इससे ग्रामीणों में और नाराजगी फैल गई है। पुलिस ने दोनों पक्षों को समझाइश दी और धर्मेश व उसके ड्राइवर को थाने ले गई।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *