प्रधान जिला एवं सत्र न्यायाधीश सह जिला विधिक सेवा प्राधिकार के अध्यक्ष मनोज प्रसाद ने कहा कि आम नागरिकों को सुलभ, त्वरित और किफायती न्याय उपलब्ध कराने के लिए 14 मार्च को गढ़वा जिला मुख्यालय सहित अनुमंडलीय न्यायालयों में वर्ष की प्रथम राष्ट्रीय लोक अदालत का आयोजन किया जाएगा। सभी लोगों को न्याय दिलाना ही उद्देश्य है। मंगलवार को व्यवहार न्यायालय स्थित सभागार में प्रेस कांफ्रेंस में बोल रहे थे। उन्होंने कहा कि नालसा और झालसा के निर्देशानुसार इस लोक अदालत में लंबित और प्री-लिटिगेशन मामलों का निपटारा आपसी समझौते के आधार पर किया जाएगा। उन्होंने कहा कि लोक अदालत का उद्देश्य वर्षों से लंबित मामलों का स्थायी समाधान निकालना है। यहां पारित निर्णय अंतिम होता है और इसके विरुद्ध अपील का प्रावधान नहीं है। समझौते की स्थिति में जमा कोर्ट फीस भी वापस कर दी जाती है, जिससे पक्षकारों को समय और धन दोनों की बचत होती है। मौके पर उपायुक्त सह डीएलएसए के उपाध्यक्ष दिनेश कुमार यादव ने प्रशासन की ओर से पूर्ण सहयोग का आश्वासन दिया। उन्होंने बताया कि राजस्व, बैंक ऋण और विभिन्न सरकारी विभागों से संबंधित मामलों के त्वरित निपटारे के लिए विशेष शिविर लगाए जाएंगे, ताकि अधिक से अधिक मामलों का समाधान संभव हो सके। डीएलएसए की सचिव निभा रंजना लकड़ा ने कहा कि राष्ट्रीय लोक अदालत में आपराधिक शमनीय मामले, एनआई एक्ट (चेक बाउंस) के प्रकरण, बैंक रिकवरी, मोटर दुर्घटना दावा (MACT), श्रम विवाद, बिजली-पानी बिल बकाया, वैवाहिक विवाद (तलाक को छोड़कर), भरण-पोषण, राजस्व एवं अन्य दीवानी मामलों का निपटारा किया जाएगा। जिला विधिक सेवा प्राधिकार ने नागरिकों से न्यायालय में लंबित मामला और मुकदमेबाजी से बचने के लिए संबंधित न्यायालय अथवा डीएलएसए कार्यालय से संपर्क कर अपने मामले को लोक अदालत में सूचीबद्ध कराने और आपसी समझौते के माध्यम से त्वरित न्याय का लाभ उठाने की अपील की है।


