भास्कर न्यूज | जालंधर ‘आज का विद्वत समाज आधुनिक जीवन की आपाधापी में एक पूर्ण सतगुरु की अनिवार्यता भूल बैठा है। परंतु यदि हम इतिहास पर सरसरी नजर डालें तो श्रेष्ठ मानवों का गठन सदा सतगुरु के हस्त तले ही हुआ है। स्वामी विरजानंद का आश्रम दयानंद सरस्वती की निर्माण स्थल थी। वहीं समर्थ गुरु रामदास जी के सामर्थ्य ने ही शिवा को छत्रपति शिवाजी बनाया था। इसी तरह चाणक्य की कुटिया चंद्रगुप्त मौर्य का प्रशिक्षण केंद्र बनीं तो नरेंद्र में छिपे विवेकानंद को परमहंस के सधे हुए हाथों ने ही तराशा। उक्त प्रवचन गुरुदेव आशुतोष महाराज की शिष्या साध्वी पल्लवी भारती ने दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से बुधवार को विधिपुर आश्रम में शुरू हुए सत्संग के दौरान कहे। साध्वी ने कहा कि कहने का भाव यह है कि समाज के क्षितिज पर जब भी कोई व्यक्तित्व प्रदीप्त हुआ, तो उसमें गुरु का ही कृपा प्रकाश काम कर रहा था। समाज को ऐसे श्रेष्ठ व्यक्ति गुरुओं की ही देन हैं। तभी तो शास्त्रों में सतगुरु की तुलना ब्रह्मा, विष्णु और महेश से की गई है। मार्ग में जब कोई बाधाएं या रुकावटें आती हैं तो ऐसे में गुरु ही शिष्य की रक्षा करते हैं। पग-पग पर वे ही संभालते हैं। गुरु शिष्य के जन्म-जन्मांतरों के कर्मों व कुसंस्कारों का खात्मा करते हैं, तभी गुरु को शिव भी कहा गया है। दिव्य ज्योति जाग्रति संस्थान की ओर से विधिपुर आश्रम में शुरू हुए सत्संग में शामिल श्रद्धालु (इनसेट) प्रवचन करतीं साध्वी पल्लवी भारती।


