समिति से गायब मिला 27 लाख का धान,दर्ज हुई FIR:सरगुजा में भौतिक सत्यापन में 888 क्विंटल धान कम मिला, कलेक्टर से मिलने समितियों के प्रबंधक

सरगुजा जिले के कुंदीकला सहकारी समिति से 27 लाख 50 हजार रुपये का धान कम मिला है। मामले में प्रशासन ने समिति प्रबंधक एवं कंप्यूटर आपरेटर के खिलाफ एफआईआर के लिए थाने में आवेदन दिया है। इधर समितियों के प्रबंधक एवं कंप्यूटर आपरेटर कलेक्टर से मिलने पहुंचे और निष्पक्ष जांच की मांग की। जानकारी के मुताबिक, सरगुजा कलेक्टर अजीत वसंत के निर्देश पर धान उपार्जन केंद्र कुंदीकला का भौतिक सत्यापन 18 जनवरी को जिला खाद्य अधिकारी, जिला विपणन अधिकारी एवं नोडल अधिकारी स्टेट वेयर हाउस द्वारा संयुक्त रूप से किया गया। भौतिक सत्यापन के दौरान उपार्जन केन्द्र में कुल 2221 बोरी (888.40 क्विंटल) धान कम मिला। समिति के प्रबंधक एवं कंप्यूटर आपरेटर इसका स्पष्ट जवाब नहीं दे सके। प्रबंधक व कंप्यूटर आपरेटर के खिलाफ FIR
धान खरीदी में लापरवाही पर धान उपार्जन केन्द्र कुंदीकला के समिति प्रबंधक दिलीप यादव एवं कम्प्यूटर ऑपरेटर गोविंद बेहरा के विरुद्ध एफआईआर दर्ज करने के लिए जांच रिपोर्ट सहित आवेदन धौरपुर पुलिस को सौंपा गया है। सरगुजा कलेक्टर ने स्पष्ट किया है कि शासन की धान उपार्जन एवं मिलिंग व्यवस्था में किसी भी प्रकार की अनियमितता, लापरवाही अथवा गड़बड़ी को किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा। अन्य समितियों का भी सत्यापन कराया जाएगा। कलेक्टर से मिलने पहुंचे समितियों के प्रबंधक
कुंदीकला समिति में हुई कार्रवाई के बाद समितियों के प्रबंधकों ने सरगुजा कलेक्टर से मुलाकात की और कहा कि भौतिक सत्यापन में सही आकलन नहीं किया गया है। इसकी निष्पक्ष जांच की जानी चाहिए। लाटों में धान की मात्रा का सही आंकलन नहीं किया गया है। सरगुजा कलेक्टर ने आश्वस्त किया है कि इसकी फिर से जांच की जाएगी, लेकिन गड़बड़ी मिली तो बख्शा नहीं जाएगा। सरकार की मंशा खरीदी की नहीं-राकेश गुप्ता
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राकेश गुप्ता ने कहा कि सरकार के लोग सिर्फ बातों में एक-एक दाना खरीदी की बात कर रहे हैं। पिछले वर्ष तक के 19 जनवरी तक के आंकड़े देखें, तो इस वर्ष खरीदी काफी कम है। समितियों से धान का उठाव नहीं हो पा रहा है। इसके कारण धान खरीदी प्रभावित हो रही है। राकेश गुप्ता ने कहा कि 11 दिन बचे है, समितियों में धान खरीदी के लिए। इसके लिए किसानों को टोकन के लिए भटकना पड़ रहा है। यह विषम परिस्थिति है। समितियों के लोग भी इस व्यवस्था से परेशान हैं।

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