दौसा में सरकारी कार्यक्रमों में कांग्रेस सांसद और विधायक को नहीं बुलाने को लेकर हुए विवाद के बाद कलेक्टर देवेन्द्र कुमार ने सरकारी भवनों के शिलान्यास-उद्घाटन के संबंध में सभी जिला स्तरीय अधिकारियों को आदेश जारी किए हैं। जिसमें मुख्य सचिव, प्रशासनिक सुधार एवं समन्वय विभाग के 17 फरवरी 2020 के परिपत्र जिक्र करते हुए लिखा है- सरकारी भवनों के शिलान्यास-उद्घाटन कार्यक्रमों एवं अन्य राजकीय समारोह जो राजकीय धनराशि से आयोजित हो, चाहे वे किसी राजकीय उपक्रम, बोर्ड, निगम या स्वायत्तशासी संस्था के हो, में जनप्रतिनिधियों यथा सांसद, विधायक, जिला प्रमुख, प्रधान, नगर निकायों के मेयर/सभापति/अध्यक्ष, ग्राम पंचायत के सरपंच एवं जनप्रतिनिधियों, विशेषतः कार्यक्रम स्थल क्षेत्र से संबंधित जन प्रतिनिधिगण को आवश्यक रूप से आमंत्रित किए जाने के संबंध में निर्देश दिए गए हैं। लेकिन जनप्रतिनिधियों से इस सम्बंध में प्राप्त शिकायती पत्रों से यह स्पष्ट होता हैं कि अधिकारियों द्वारा राज्य सरकार द्वारा जारी इन आदेशों की पालना में लापहरवाही बरती जा रही हैं जो कि अत्यंत गंभीर विषय है। ऐसे में विभाग के परिपत्र के निर्देशों की अक्षरशः पालना किया जाना सुनिश्चित करें। सांसद-विधायक ने बताया था अधिकारों का हनन
पिछले दिनों दौसा के लवाण ब्लॉक में सरकारी स्कूल भवनों के शिलान्यास कार्यक्रमों में सांसद मुरारीलाल मीणा और विधायक दीनदयाल बैरवा को आमंत्रित नहीं किया गया था। यही नहीं शिलान्यास पट्टिका पर सांसद-विधायक के नाम भी नहीं लिखवाए गए थे। इन कार्यक्रमों में विधानसभा उपचुनाव में भाजपा प्रत्याशी रहे जगमोहन मीणा को बतौर मुख्य अतिथि बुलाया गया था। जिसे लेकर सांसद ने लोकसभा अध्यक्ष और मुख्य सचिव को पत्र लिखकर शिकायत की थी। इस सम्बंध में विधायक डीसी बैरवा ने भी कलेक्टर से शिकायत की थी और निर्वाचित जनप्रतिनिधि के अधिकारों का हनन बताते हुए विधानसभा में मुद्दा उठाने की बात कही थी। जिसके बाद कलेक्टर ने आदेश जारी किए हैं।


