सरकारी और निजी स्कूलों में पढ़ने वाले विद्यार्थियों के लिए अब गुरुवार का दिन कुछ खास होने वाला है। शिक्षा विभाग ने एक महत्वपूर्ण बदलाव करते हुए प्रदेश के सभी विद्यालयों में गुरुवार को ‘ड्रेस कोड’ अनिवार्य न रखने का फैसला किया है। अब बच्चे सप्ताह में एक दिन अपनी पसंद के साधारण (सिविल) कपड़ों में स्कूल जा सकेंगे। जिला शिक्षा अधिकारी ने बताया कि इस संबंध में माध्यमिक शिक्षा निदेशक सीताराम जाट ने निर्देश जारी कर दिए हैं। इस आदेश के तहत अब सभी सरकारी और मान्यता प्राप्त निजी स्कूलों को हर गुरुवार ‘नो यूनिफॉर्म डे’ के रूप में मनाना होगा। क्यों लिया गया यह फैसला इस नई व्यवस्था के पीछे विभाग ने दो मुख्य तर्क हैं। स्वच्छता और धुलाई: अक्सर बच्चों के पास यूनिफॉर्म के सीमित सेट होते हैं। सप्ताह के बीच में गुरुवार का दिन तय होने से अभिभावकों को बच्चों की यूनिफॉर्म धोने और उसे सुखाने का पर्याप्त समय मिल सकेगा। मानसिक ताजगी: रोजाना एक ही तरह के पहनावे से बच्चों में आने वाली बोरियत को कम करने और उन्हें स्कूल के प्रति उत्साहित करने के लिए यह ‘कलरफुल’ बदलाव किया गया है। जिले 5 लाख बच्चों को जिले के लगभग 2600 स्कूलों में यह नियम लागू होगा। सरकारी और निजी स्कूलों के करीब 5 लाख से अधिक विद्यार्थी इस सुविधा का लाभ उठा सकेंगे। निजी स्कूलों के लिए भी नया नियम अब तक कई निजी स्कूलों में बुधवार या शनिवार को अलग ड्रेस कोड (जैसे हाउस ड्रेस या स्पोर्ट्स ड्रेस) रखने की परंपरा थी। लेकिन शिक्षा विभाग के ताजा निर्देशों के बाद अब सरकारी और निजी, दोनों ही क्षेत्रों के स्कूलों के लिए गुरुवार का दिन ‘नो यूनिफॉर्म’ के लिए निर्धारित कर दिया गया है, ताकि पूरे प्रदेश में एकरूपता बनी रहे।


