पाली | राजकीय उच्च प्राथमिक विद्यालय बिरामी ढाणी (पाली) में कार्यरत शिक्षक महेन्द्रसिंह राठौड़ ने जय जय जयते-श्री सत्यमेव जयते पुस्तक लिखी है। पुस्तक में भारत भूमि को संपूर्ण विश्व के लिए ज्ञान, दर्शन और सत्य का केंद्र बताया गया है। राठौड़ बताते हैं कि इस पुस्तक का विचार अचानक नहीं आया। सरकारी स्कूल में पढ़ाते हुए जब विद्यार्थी जीवन, सत्य और उद्देश्य जैसे प्रश्न पूछते थे, तब मुझे महसूस हुआ कि पाठ्यक्रम के बाहर भी बहुत कुछ ऐसा है, जिस पर बात होना जरूरी है। यही नोट्स और डायरी में दर्ज होने लगे, जो आगे चलकर पुस्तक का आधार बने।


