सरकारी स्कूल टीचर 23 जिलों की रेत माफिया:खनिज नाकों पर भी माफिया के कर्मचारी; ड्राइवर बन भास्कर रिपोर्टर ने किया खुलासा

एमपी में एक स्कूल टीचर ने रेत के अवैध कारोबार में बड़े-बड़े रेत माफिया को भी पीछे छोड़ दिया है। टीचर की मर्जी के बगैर सड़क से रेत का एक डंपर भी नहीं गुजर सकता। टीचर का नाम प्रतिभा राय है, जो सागर जिले के बीना के एक छोटे से गांव किर्रोद के सरकारी स्कूल में मैथ्स पढ़ाती है। बच्चों को पढ़ाने के साथ-साथ प्रतिभा राय पूरे जिले में रेत के अवैध कारोबार को कंट्रोल करती है। चाहे वह खनिज नाकों से गाड़ी को पास कराना हो या फिर रेत की अवैध खदानों का संचालन हो। वह खुद को रेत का खनन करने वाली एक निजी कंपनी से जुड़ा बताती है। खनिज नाकों पर भी प्रतिभा राय के कर्मचारी ही तैनात हैं, जो गाड़ियों को चेक करने के बाद ही आगे जाने देते हैं। खास बात ये है कि खनिज विभाग के अफसर भी ये जानते हैं, लेकिन कोई कार्रवाई नहीं करते। भास्कर टीम ने इस पूरे सिंडिकेट को बेनकाब करने के लिए 20 दिनों तक अशोक नगर, मुंगावली, सागर, बीना और खुरई के इलाकों में अंडरकवर ऑपरेशन चलाया। हमारे रिपोर्टर कभी डंपर ड्राइवर बने तो कभी हेल्पर, ताकि इस गठजोड़ की हर परत को उजागर किया जा सके। इस पड़ताल में सामने आया कि कैसे यह टीचर, खनिज विभाग के भ्रष्ट अधिकारी और पुलिस की मिलीभगत से वैध को अवैध और अवैध को वैध बनाकर सरकारी खजाने को करोड़ों का नुकसान पहुंचा रही है। पढ़िए रिपोर्ट…. भास्कर रिपोर्टर बना डंपर मालिक
इस सिंडिकेट की तह तक पहुंचने के लिए हमारी टीम ने एक डंपर मालिक बनकर इस खेल में एंट्री की। हमने पाया कि खनिज विभाग के नाके सिर्फ दिखावे के लिए हैं। इन नाकों पर विभाग के कर्मचारी नहीं, बल्कि शिक्षिका प्रतिभा राय के निजी गुर्गे तैनात हैं, जो हर आने-जाने वाले डंपर से वसूली करते हैं। यदि कोई डंपर चालक बिना ‘मैडम’ की अनुमति के रेत ले जाने की कोशिश करता है तो उसका डंपर जब्त कर लिया जाता है और लाखों का जुर्माना लगाया जाता है। इस पूरे खेल में खनिज विभाग के अधिकारी भी शामिल हैं, जिन्हें हर डंपर पर 5,000 रुपए का हिस्सा पहुंचता है। टीचर बोलीं- नाके हमारे हैं… काली रेत के तो हम ही मालिक हैं
इस नेटवर्क की सरगना शिक्षिका प्रतिभा राय से जब हमारे रिपोर्टर ने डंपर मालिक बनकर मुलाकात की तो उसने बेखौफ होकर अपने काले कारोबार की कहानी खुद ही बयां कर दी। उसने न केवल यह स्वीकार किया कि सागर जिले के सभी 17 खनिज नाके उसी के हैं, बल्कि यह भी दावा किया कि प्रदेश के 23 जिलों में उसका रेत का कारोबार फैला है। रिपोर्टर: गाड़ियां निकलती हैं तो कई बार खनिज नाकों पर लोग रोक देते हैं। प्रतिभा राय: नहीं, ऐसे तो किसी को नहीं रोकते। नाके हमारे हैं, लेकिन रॉयल्टी होगी तो कोई नहीं रोकेगा। कोई दिक्कत होगी तभी रोका होगा। आपको पता नहीं होगा, रॉयल्टी खत्म हो गई होगी। हर गाड़ी की एंट्री होती है, कलेक्टर तक के पास रजिस्टर जाता है। जब रिपोर्टर ने कहा कि नाकों पर आपका या नीरज नाम के व्यक्ति का नाम चलता है, तो उसने तुरंत स्वीकार किया। प्रतिभा राय: हां, नाके तो हमारे हैं। सागर जिले में कुल 17 नाके हैं हमारे… ये सभी नाके गलत काम रोकने के लिए हैं, सही काम रोकने के लिए नहीं। प्रतिभा ने यह भी साफ कर दिया कि उसके सिंडिकेट के बाहर का कोई भी व्यक्ति इस धंधे में नहीं आ सकता। रिपोर्टर: मुझे रिफाइनरी में एक टेंडर मिला है, बेतवा की काली रेत लगेगी। चाहता हूं कि वहां से गाड़ियां भरवा लें। प्रतिभा राय: भरने का सिस्टम नहीं है, माल तो आपको हमसे ही लेना पड़ेगा। गाड़ियां हम भी भरकर देंगे। चुनिंदा गाड़ियों की लिस्ट है, खदान से वहीं गाड़ियां भरी जाती हैं। इतना ही नहीं उसने हंसते हुए यह भी कबूल किया कि काली रेत का कारोबार पूरी तरह अवैध है और वह खुद इसकी मालिक है। रिपोर्टर: हमारी कैसे मदद हो सकती है? प्रतिभा राय: आप बताओ, लाल रेत मतलब नर्मदा सेंट के लिए वर्क ऑर्डर की जरूरत पड़ेगी, काली रेत के लिए नहीं। रिपोर्टर: क्यों, काली रेत पर क्यों नहीं? प्रतिभा राय: (हंसते हुए) काली रेत के तो हम ही मालिक हैं, इसके लिए वर्क ऑर्डर की जरूरत नहीं पड़ेगी। माइनिंग इंस्पेक्टर बोला- मुझे सीधे कॉल करना
इस काले कारोबार में खनिज विभाग के अफसर भी शामिल है। हमारी टीम ने सागर जिले के माइनिंग इंस्पेक्टर सुनील कुमार उईके और उसके निजी वसूली एजेंट मनोहर पटेल को भी रंगे हाथों पकड़ा। रिपोर्टर ने डंपर मालिक बनकर मनोहर से संपर्क किया, जिसने बताया कि अगर बिना ‘सिस्टम’ के गाड़ी चलाई तो 15 लाख का चालान कट सकता है। कुछ देर बाद माइनिंग इंस्पेक्टर सुनील उईके खुद मौके पर पहुंचा और रिपोर्टर को हर तरह की सुरक्षा का आश्वासन दिया। उईके ने कहा आप मेरा नंबर लो और मुझे सीधे कॉल करना… यदि आपकी रॉयल्टी का टाइम आउट भी हो गया तो भी कोई दिक्कत नहीं आएगी। गाड़ी जब्त न करवा दे थाने में कहकर, हम वहां से तत्काल गाड़ी निकलवाएंगे दो मिनट में। उईके ने कहा कि वो (प्रतिभा राय) कौन होती है? उसके रास्ते अपने को मालूम हैं। उसका भी रेत सप्लाई का काम है, उसकी एम सेंट भी नहीं देती है। यदि कोई दिक्कत हो तो मनोहर को बोलना वह 24 घंटे मेरे साथ रहता है। नहीं भी रहता है तो तत्काल बात होती है। मेरे नंबर 940XXXX648 पर मिस कॉल कर दो। रिश्वत का रेट कार्ड: ‘हर गाड़ी 5000 रुपए’
बातचीत के आखिर में जब रिपोर्टर ने पूछा कि इसके लिए क्या करना होगा, तो इंस्पेक्टर ने अपने एजेंट मनोहर से बात करने का इशारा किया। मनोहर ने बिना किसी झिझक के रिश्वत का रेट कार्ड बता दिया। मनोहर: वो आपको बताया था, पर गाड़ी 5000 रुपए। रिपोर्टर: आपको भेज दूंगा। मनोहर: अभी दिक्कत बहुत ज्यादा है। अभी हो सके तो कर दो। जब रिपोर्टर ने कहा कि वह शाम तक पैसे ट्रांसफर करेगा, तो मनोहर ने अपना QR कोड भेजने की बात कही। इतना ही नहीं, उसने इंस्पेक्टर के अलावा अपने और एक अन्य साथी के लिए 1000-1000 रुपए अलग से मांगे। जिला शिक्षा अधिकारी बोले- लिखित में किसी ने शिकायत नहीं की
एक तरफ जहां प्रतिभा राय 23 जिलों में रेत का सिंडिकेट चलाने का दावा कर रही है, वहीं सागर के जिला शिक्षा अधिकारी अरविंद जैन के रिकॉर्ड के मुताबिक, वह नियमित रूप से स्कूल आ रही है। उन्होंने भास्कर को बताया, प्रतिभा राय जिला सागर बीना के गांव किर्रोद के शासकीय स्कूल में पदस्थ हैं। नवंबर में भी वे 25 दिन स्कूल आई हैं। उन्हें जब बताया कि वह शिक्षिका होने के साथ रेत के अवैध कारोबार में इन्वाल्व है, तो उन्होंने कहा- ऐसा सुनने में आता है।

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