सरकार और समाजसेवी संगठनों के प्रयासों के बाद भी पूरी तरह काबू में नहीं आ रही बीमारी

भास्कर न्यूज | गढ़वा जिले में क्षय रोग (टीबी) उन्मूलन को लेकर स्वास्थ्य विभाग द्वारा लगातार जागरूकता अभियान चलाया जा रहा है। गांव-गांव, पंचायत स्तर और स्वास्थ्य केंद्रों के माध्यम से लोगों को टीबी के लक्षण, इलाज और रोकथाम की जानकारी दी जा रही है। इसके बावजूद जिले में टीबी मरीजों की संख्या में अपेक्षित कमी नहीं आ पा रही है, जो स्वास्थ्य विभाग के लिए एक बड़ी चुनौती बनी हुई है। स्वास्थ्य विभाग से प्राप्त आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2024 के जनवरी से दिसंबर तक जिले में कुल 2164 टीबी मरीज चिन्हित किए गए, जिनमें से 2095 मरीजों को सफल इलाज के बाद ठीक घोषित किया गया। वहीं वर्ष 2025 में जनवरी से नवंबर तक 1870 नए टीबी मरीज सामने आए, जबकि 1956 मरीज इलाज के बाद स्वस्थ हुए। यह आंकड़ा दर्शाता है कि इलाज की सफलता दर बेहतर है, लेकिन नए मरीजों की संख्या अब भी चिंता का विषय बनी हुई है। समाजसेवी संगठनों की अहम भूमिका : टीबी उन्मूलन की दिशा में सरकार के साथ-साथ सामाजिक संगठनों की भागीदारी भी लगातार बढ़ रही है। जिले में 201 टीबी मरीजों को विभिन्न समाजसेवी संगठनों द्वारा गोद लिया गया है, जिन्हें नियमित रूप से बास्केट फूड उपलब्ध कराया जा रहा है। इसमें पोषणयुक्त खाद्य सामग्री शामिल है, जिससे मरीजों की रोग प्रतिरोधक क्षमता बढ़े और वे दवा का पूरा कोर्स पूरा कर सकें। इन प्रयासों का सकारात्मक परिणाम यह रहा कि गढ़वा जिले की कुल 54 पंचायतों को टीबी फ्री घोषित किया गया है। टीबी फ्री पंचायत घोषित होने के बाद संबंधित पंचायतों में नियमित निगरानी, जांच और जागरूकता कार्यक्रम जारी रखे जा रहे हैं, ताकि बीमारी की दोबारा वापसी न हो। आर्थिक सहायता के बावजूद लापरवाही : सरकार द्वारा टीबी से ग्रसित मरीजों को प्रत्येक माह ₹1000 की आर्थिक सहायता (निक्षय पोषण योजना) दी जाती है, ताकि वे पौष्टिक भोजन ले सकें और इलाज के दौरान कमजोर न हों। इसके बावजूद कई मरीज दवा नियमित रूप से नहीं लेते, बीच में इलाज छोड़ देते हैं या बीमारी को छुपाने का प्रयास करते हैं। यही कारण है कि टीबी पूरी तरह खत्म नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य विभाग के अधिकारियों का मानना है कि दवा बीच में छोड़ने से बीमारी और अधिक गंभीर हो जाती है और ड्रग रेसिस्टेंट टीबी का खतरा बढ़ जाता है, जो इलाज के लिहाज से बेहद जटिल होती है। विशेषज्ञों के अनुसार, टीबी एक पूरी तरह से इलाज योग्य बीमारी है, बशर्ते मरीज समय पर जांच कराए और पूरे छह से नौ महीने तक दवा नियमित रूप से ले। खांसी, वजन कम होना, रात में पसीना आना और लगातार बुखार जैसे लक्षण दिखते ही तुरंत जांच जरूरी है। स्वास्थ्य विभाग ने आम लोगों से अपील की है कि टीबी को लेकर किसी तरह का डर या झिझक न रखें। समय पर इलाज और सामाजिक सहयोग से ही गढ़वा जिले को पूरी तरह टीबी मुक्त बनाया जा सकता है।

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