अवैध कॉलोनियों को वैध करने का शिवराज सरकार की पहल का शहर में उलटा असर पड़ा। सरकार की घोषणा के तहत 2020 तक की चिह्नित 43 अवैध कॉलोनियों को 2021-2022 में वैध कर दिया गया। इस प्रक्रिया के बाद शहर व समीप के ग्रामीण सर्वे नंबरों में 4 गुना ज्यादा स्पीड से अवैध कॉलोनी कट गई। पिछले 4 सालों में इस तरह की 141 नई अवैध कॉलोनियां खड़ी हो गई। पिछले 4 सालों में शहर में इतनी तेजी से बढ़ी अवैध कॉलोनियों का आंकड़ा देख अफसर भी पसोपेश में पड़ गए, क्योंकि सभी कॉलोनियों को वैध करते हुए उन्हें एक जैसी सुविधा मुहैया का नगर निगम की मंशा पर अवैध कॉलोनाजरों ने पानी फेर दिया। पिछले दो साल की ही बात करें तो इस समय में ही 20 से ज्यादा अवैध कॉलोनियां कटी है। खास बात यह है कि खुलेआम अवैध कॉलोनियां काटने वालों पर अफसर रोक लगाने की हिम्मत भी नहीं जुटा पा रहे हैं। राजनीतिक उलझन में पड़े, इसलिए निगम के अफसरों ने भी अवैध कॉलोनियों की फाइल ही अलग रख दी। प्रतिबंधित क्षेत्र में काट दी कॉलोनी
स्थाई निर्माण प्रतिबंधित रहने के बावजूद सिंहस्थ मेला क्षेत्र के कुछ हिस्सों पर अवैध कॉलोनी बसा दी गई। साडू माता के सामने भदेड़ मय चक तहसील घट्टिया सर्वे 91/2 में अवैध कॉलोनी काट दी गई। सर्वे क्र. 128/2 के 0.200 हेक्टेयर में उज्जवलनगर के नाम से कॉलोनी काट दी। इनके अलावा 139 अवैध कॉलोनी की सूची है। फैक्ट फाइल अफसरों की अनदेखी का नतीजा
काटी जा रही अवैध कॉलोनियों पर कार्रवाई अफसरों को करना है, लेकिन अधिकारी ध्यान देने को ही तैयार नहीं है। हमारे प्रभारी सदस्यों ने कई बार लिखित अफसरों को अवैध कॉलोनी की जानकारी दी। मैंने निर्देश दिए, लेकिन ऐसा नहीं हो सका। अवैध कॉलोनियां अफसरों की अनदेखी का नतीजा है। – मुकेश टटवाल, महापौर


