सरकार बने 30 माह बीत चुके मगर सरकारी अफसर-मुलाजिम पहले जैसे मनमाने टाइम पर आ रहे

आम आदमी पार्टी की सरकार बने 30 माह बीत चुके हैं मगर सरकारी दफ्तरों में अफसरों-मुलाजिमों की टाइमिंग अभी तक कोई सुधार नहीं हुआ है। मुलाजिम 1 से डेढ़ घंटा देरी दफ्तर पहुंच रहे हैं। बाद सुबह 9 बजे तक 90 फीसदी अफसर-मुलाजिम गैरहाजिर रहते हैं ।शिकायतों के बाद दैनिक भास्कर टीम ने दो दिन सुबह पौने 10 बजे और 10 बजे नगर निगम के दफ्तर का मौका-ए-मुआयना किया तो अफसर-कर्मी ही नहीं विभागें के हैड भी कुर्सियों पर नहीं मिले। हैरानीजनकर है कि महज 4 से 6 घंटे ड्यूटी दे रहे इन मुलाजिमों की अटेंडेंस पूरे 8 घंटे क्लीयर कर दी जाती है। पार्षद भी निगम दफ्तर में समय से सीट पर न बैठने और शाम 5 बजे के पहले निकल जाने को लेकर विरोध जता चुके हैं। सीसीटीवी की जांच कराई जाए तो कई शॉर्ट अटेंडेंस के दायरे में आ जाएंगे। उच्च अफसर मुलाजिमों पर इस कद्र मेहरबान हैं कि उन्हें लापरवाही नजर नहीं आती। मामले को गंभीरता से लेने की बजाय बचाव में उतर जाते हैं कि फील्ड वर्क में भी जाना होता है। जबकि सुबह 9 बजे अटेंडेंस पंच करना जरूरी होता है। यदि फील्ड-मीटिंग या इमरजेंसी कामों से कहीं जाना पड़ रहा तो लॉग बुक में एंट्री करनी होती है। कितने बजे दफ्तर छोड़ रहे और कब वापस आएंगे। अफसरों को गेट पर पब्लिक नोटिस लगाना होता है। हैरानीजनक यह है कि मेयर जतिंदर मोती भाटिया दफ्तर में शाम 6 बजे तक बैठ रहे हैं, जबकि निगम अफसर-मुलाजिमों की टाइमिंग ही नहीं रह गई है।

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