झारखंड से टीएसी सदस्य एवं केंद्रीय सरना समिति के अध्यक्ष नारायण उरांव ने कहा कि सरना धर्म कोड के लिए सामूहिक रूप से दिल्ली जाना जरूरी है। इसे संवैधानिक मान्यता दिलाने के लिए सरना समाज को संगठित और एकजुट होकर संघर्ष करना होगा। सरना धर्म प्रकृति, जल, जंगल और जमीन से जुड़ी आदिवासी जीवन पद्धति और समाज की मूल पहचान है। मौके पर विकास उरांव, मुन्ना उरांव, जोसफिना उरांव, रजनी उरांव, सुखमनी उरांव, संध्या उरांव, विमला टोप्पो सहित कई लोग शामिल हुए। उरांव गुरुवार को पश्चिम बंगाल के जलपाईगुड़ी जिले में आयोजित दिव्य दर्शन एवं आध्यात्मिक सरना प्रार्थना सभा को संबोधित कर रहे थे। प्रार्थना सभा में सरना धर्मावलंबियों ने पारंपरिक रीति-रिवाज के अनुसार प्रकृति की आराधना कर समाज की सुख-शांति, एकता और समृद्धि की कामना की। कार्यक्रम में झारखंड और पश्चिम बंगाल के विभिन्न क्षेत्रों से आए सरना समाज के सामाजिक अगुवा, धर्मगुरु, महिलाएं एवं युवा शामिल हुए।


