सरिस्का : बफर रेंज की बाघिन एसटी-2303 पहली बार मां बनी, एक शावक के साथ कैमरा ट्रैप में नजर आई, बफर जोन में अब 10…

भास्कर न्यूज | अलवर सरिस्का टाइगर रिजर्व का बफर जोन लगातार बाघों से समृद्ध हो रहा है। मंगलवार को कैमरा ट्रैप में 4 वर्षीय बाघिन एसटी-2302 अपने एक शावक के साथ दिखाई दी। यह बाघिन करणी माता मंदिर और बालाकिला क्षेत्र में विचरण करती है। नए शावक के जन्म से सरिस्का में बाघों की कुल संख्या अब 49 हो गई है। इनमें 11 नर, 18 मादा और 20 शावक शामिल हैं। यह सरिस्का में बाघों के पुनर्वास के बाद सर्वाधिक है। साल 2025 में अब तक 8 शावकों का जन्म हो चुका है। अप्रैल में बाघिन एसटी-30 पहली बार 3 शावकों के साथ नजर आई थी, जबकि जून में बाघिन एसटी-19 अपने 4 शावकों संग कैमरे में कैद हुई। अब एसटी-2302 का नया शावक भी इस सूची में जुड़ गया है। पिछले दो वर्षों में सरिस्का में कुल 21 शावकों का जन्म हो चुका है, जिससे यह क्षेत्र तेजी से ‘टाइगर नर्सरी’ के रूप में उभर रहा है। वर्ष 2024 में यहां एक वर्ष में सर्वाधिक 13 शावकों ने जन्म लिया था। सरिस्का के सीसीएफ संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि बाघिन करणी माता मंदिर के आसपास विचरण करती है। शावकों के जन्म के बाद बाघिन थोड़ी आक्रामक हो जाती है। इसलिए मंदिर दर्शन के लिए जाने वाले श्रृद्धालुओं को सावधानी बरतने की जरूरत है। गौरतलब है कि करणी माता का 22 सितंबर में 9 दिवसीय मेला है। इस दौरान हजारों लोग करणी माता के दर्शन के लिए पहुंचते हैं। सरिस्का के बफर जोन में आने वाली पहली बाघिन एसटी-19 थी। इसके बाद बाघ एसटी-18 ने भी यहीं टेरिटरी बना ली। इसके बाद इस क्षेत्र को अलवर वन मंडल क्षेत्र से हटा सरिस्का के बफर जोन के रूप में शामिल किया गया। एसटी-19 ने वर्ष 2022 में मादा एसटी- 2302 और नर एसटी- 2303 को जन्म दिया। इनमें एसटी-2303 को पिछले साल रामगढ़ विषधारी टाइगर रिजर्व में शिफ्ट किया जो सरिस्का से किसी अन्य रिजर्व में भेजे जाने वाला पहला बाघ था। लेकिन उसकी रामगढ़ में दूसरे बाघ के साथ टेरिटोरियल फाइट में मौत हो गई। इसके बाद एसटी-19 ने वर्ष 2023 में तीन शावकों को जन्म दिया। ये एसटी-2403, एसटी -2404 और एसटी-2405 तीनों मादा हैं। सरिस्का प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार बफर रेंज में बाघ एसटी-18 और बाघिन एसटी -19 के अलावा बाघिन एसटी -2302, बाघिन एसटी-2403 और बाघिन- 2404 का लगातार मूवमेंट है। बाघिन एसटी -2405 अकबरपुर क्षेत्र रेंज में चली गई है। इस प्रकार यहां अब एक बाघ, 4 बाघिनें और 5 शावक हो गए हैं। बालाकिला, बारांलिवारी और सिलीसेढ़ के आसपास के क्षेत्र में रियासतकाल से बाघ विचरण करते आए हैं। वर्ष 2012 में अलवर वन मंडल से इस क्षेत्र को सरिस्का के बफर जोन में शामिल किया। 2015 में सफारी शुरु करवाई और पर्यटकों को जोड़ा। वन्यजीवों के वॉटर हॉल्स बनवाए। बेहतर संरक्षण के चलते बाघ यहां स्थायी रूप से बसने लगे। अब यह क्षेत्र न सिर्फ नया ब्रीडिंग प्वाइंट बन गया है बल्कि ईको टूरिज्म के लिए भी बड़ी संभावनाएं खोल रहा है। जिस प्रकार रणथंभौर सवाईमाधोपुर से बिल्कुल सटा है उसी प्रकार सरिस्का अलवर बफर जोन के अलवर के नजदीक आ गया है। इस क्षेत्र को सरिस्का में शामिल करने से पहले बाघों का मुवमेंट कुशालगढ, राइका तक ही था। लेकिन बाद में शहर से सटे जंगल में भी बाघ आने लगे। अब बालाकिला के बिल्कुल नजदीक शावक का जन्म हुआ है। यह न सिर्फ वाइल्डलाइफ ब्लकि ट्यूरिज्म को भी बूम देगा। -आरएस शेखावत, रिटा. आईएफएस(2010-2017 तक सरिस्का में अधिकारी रहे)

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