सरिस्का में 500 हेक्टेयर में नया चरागाह तैयार होगा, घास प्रबंधन व बीज संरक्षण की जानकारी दी, खरपतवार हटाई

सरिस्का बाघ परियोजना के रेंज अकबरपुर की उमरी चौकी पर गुरुवार को वन विभाग राजस्थान की ओर से चरागाह विकास, घास प्रबंधन और बीज संरक्षण पर एक दिवसीय कार्यशाला आयोजित की गई। कार्यशाला को वन विभाग के सेवानिवृत्त सहायक वन संरक्षक सतीश शर्मा ने संबोधित किया। कार्यक्रम में सरिस्का बाघ परियोजना के सभी रेंजों का स्टाफ बड़ी संख्या में उपस्थित रहा। कार्यशाला में बीजों के प्रकार, बीज संग्रहण की तकनीक, घास की विभिन्न प्रजातियों की पहचान, वन्यजीवों द्वारा पसंद की जाने वाली घास, उचित बीजारोपण विधियां और चरागाह सुधार के वैज्ञानिक तरीकों पर विस्तृत चर्चा की गई। विशेषज्ञों ने जानकारी दी कि सरिस्का में लगभग 500 हेक्टेयर वन क्षेत्र में चरागाह विकास और खरपतवार उन्मूलन का काम तेज गति से चल रहा है। सरिस्का टाइगर रिजर्व के फील्ड डायरेक्टर संग्राम सिंह कटियार ने बताया कि परियोजना का प्राथमिक लक्ष्य चीतल, सांभर, नीलगाय समेत सभी शाकाहारी वन्यजीवों के लिए गुणवत्तापूर्ण घास उपलब्ध कराना है। इसके साथ ही सरिस्का में जैव विविधता को सुरक्षित रखना और प्राकृतिक संतुलन बहाल करना भी प्रमुख उद्देश्य है। कार्यशाला में वनकर्मियों को बीज संग्रहण और बीजारोपण के व्यावहारिक प्रशिक्षण भी दिए गए। वन कर्मचारियों ने इस पहल को सरिस्का में जारी संरक्षण कार्यों के लिए महत्वपूर्ण कदम बताया। स्थानीय घासों को बढ़ावा, विदेशी प्रजातियों का उन्मूलन : परियोजना के तहत धामण, करडू, दूब और फूलेंटी जैसी देशी घास प्रजातियों का रोपण किया जा रहा है। साथ ही, जंगलों में तेजी से फैलने वाली आक्रामक प्रजातियों जैसे लेन्टाना, पार्थेनियम (गाजर घास), कासिया टोरा और जुलीफ्लोरा को वैज्ञानिक तरीके से हटाया जा रहा है। इससे मिट्टी संरक्षण, जलसंचयन में सुधार और वन्यजीवों के लिए बेहतर भोजन उपलब्ध होगा। चरागाह सुधार से सरिस्का की पारिस्थितिकी को दीर्घकालिक लाभ मिलेगा और वन्यजीवों के प्राकृतिक आवास को भी मजबूती मिलेगी। सरिस्का टाइगर रिजर्व में गाजरघास और लेंटाना मानसून सीजन में तेजी से फैली। इसके उन्मूलन के लिए काम शुरु कर दिया गया था। सरिस्का में बाघों की संख्या बढ़ने के साथ ही शाकाहारी जानवरों की संख्या बढ़ाना भी जरुरी है। गौरतलब है कि 5 साल के लिए प्रति 50 हेक्टेयर करीब 20 लाख रुपए दिए जाते हैं। इसमें घास लगाने, उस क्षेत्र की फेंसिंग करने, चौकीदारी सहित खरपतवारों को हटाने का काम करना होता है। सरिस्का में 500 हेक्टेयर के लिए 5 साल में करीब 2 करोड़ रुपए खर्च होंगे। इस काम के चलते करीब 500 हेक्टेयर नया चारागाह क्षेत्र मिल सकेगा, जो शाकाहारी जीवों की भोजन की जरुरत को पूरी कर उनकी संख्या बढाने में मदद करेगा।

FacebookMastodonEmail

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *