भास्कर न्यूज | अलवर फाल्गुन महीने के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी को मनाई जाने वाली शिवरात्रि इस बार दो शुभ योगों में 15 फरवरी को सर्वार्थ सिद्धि योग में त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में मनाई जाएगी। इस दिन शिवालयों में पूजा की जाएगी। शिवालयों को आकर्षक ढंग से सजाया जाएगा। पं. यज्ञदत्त शर्मा ने बताया कि 14 फरवरी को शाम 4.02 बजे त्रियोदशी शुरू होगी। 15 फरवरी को शाम 5.05 बजे तक त्रियोदशी है। 15 फरवरी को शाम 5.06 बजे चतुर्दशी शुरू होगी, जो 16 फरवरी को शाम 5.35 बजे तक है। इस कारण इस बार 15 फरवरी को त्रियोदशी युक्त चतुर्दशी में महाशिवरात्रि का पर्व मनाया जाएगा। इस दिन सुबह 7.08 से शाम 7.48 बजे तक सर्वार्थ सिद्धि योग भी बन रहा है। इस दिन विधि विधान के साथ शिव लिंग की पूजा करनी चाहिए। पं. शर्मा के अनुसार सर्वार्थ सिद्धि योग ज्योतिष में एक अत्यंत शुभ योग माना जाता है। जिसका अर्थ है सभी इच्छाओं की पूर्ति करने वाला। यह विशेष वार (दिन) और निश्चित नक्षत्रों के संयोग से बनता है, ऐसी मान्यता है कि कार्य (जैसे व्यापार, वाहन खरीदना, खरीदारी) निश्चित रूप से सफल होता है। यह योग बाधाओं को दूर करता है और मनोवांछित फल देता है। पंचाक्षर ऊं नम: शिवाय मंत्र का जाप करना चाहिए। उन्होेंने बताया कि इस मंत्र के जाप करने से मन को शांति, मानसिक तनाव से मुक्ति, शारीरिक ऊर्जा में सुधार और आध्यात्मिक विकास होता है। यह मंत्र न केवल नकारात्मकता को दूर करता है, बल्कि जीवन में सकारात्मकता, मानसिक स्पष्टता, भय से मुक्ति और आत्म-नियंत्रण को बढ़ाता है, जिससे व्यक्ति के जीवन में सुख-समृद्धि का संचार होता है। महात्युंजय (ॐ त्र्यम्बकं यजामहे सुगन्धिं पुष्टिवर्धनम्। उर्वारुकमिव बन्धनान्मृत्योर्मुक् षीय मामृतात्।) मंत्र का जाप करना चाहिए। ऐसी मान्यता है कि इस मंत्र का जाप करने अकाल मृत्यु और असाध्य रोगों और भय से मुक्ति मिलती है। यह मानसिक शांति, सकारात्मक ऊर्जा और शारीरिक स्वास्थ्य में सुधार करता है। शिव पार्वती का विवाह हुआ: फाल्गुन के कृष्ण पक्ष की चतुर्दशी शिवरात्रि के दिन भगवान शिव और पार्वती का विवाह हुआ था। इसी दिन भगवान भोले नाथ ने वैराग्य त्याग कर गृहस्थ जीवन शुरू किया था। पूजन का श्रेष्ठ मुहूर्त: सुबह 9.54 से दोपहर 1 बजे तक लाभ व अमृत का चौघड़िया और अभिजित मुहूर्त प्रथम प्रहर: शाम 6.14 से रात 9.27 बजे तक। द्वितीय प्रहर: रात 9.28 से दोपहर 12.41 बजे तक। तृतीय प्रहर: रात 12.42 से 3.54 बजे तक। चतुर्थ प्रहर: रात 3.55 बजे से अगले दिन सुबह 7.07 बजे तक।


